चेन्नई,अंग भारत। तमिलनाडु की विधानसभा ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में राज्य गीत ‘तमिल थाई वाज्थू’ के गायन को अनिवार्य करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का सदन के सभी दलों ने बिना किसी संकोच के समर्थन किया। इस नए नियम के तहत अब राज्य में होने वाले किसी भी आधिकारिक आयोजन की शुरुआत इसी राज्य गीत से करना कानूनी रूप से जरूरी होगा। यह कदम केंद्र सरकार के उस हालिया निर्देश के बाद उठाया गया है जिसमें राष्ट्रीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम और राष्ट्रगान को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
नियम कहाँ लागू होगा?
इस नए प्रस्ताव के पारित होने के बाद इसके दायरे को काफी व्यापक रखा गया है ताकि जमीनी स्तर पर इसका कड़ा पालन हो सके। सरकार के आदेश के मुताबिक, यह नियम निम्नलिखित जगहों पर पूरी तरह लागू होगा:
- राज्य के सभी सरकारी स्कूल, कॉलेज और सरकारी विश्वविद्यालय।
- तमिलनाडु सरकार के नियंत्रण में आने वाले सभी प्रशासनिक कार्यालय।
- राज्य सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) और स्वायत्त निकाय।
- कोई भी ऐसा आयोजन जिसे राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित या आयोजित किया जा रहा हो।
विधानसभा में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं ताकि वे अपने स्तर पर इसे जल्द से जल्द लागू करवा सकें।
मुख्यमंत्री विजय का बयान
प्रस्ताव को पटल पर रखते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि उनकी सरकार तमिलनाडु के भाषाई और सांस्कृतिक अधिकारों से किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने सदन में बैठे सभी सदस्यों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करने की अपील की।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी मातृभाषा के प्रति गहरा आदर व्यक्त करते हुए कहा, “तमिल केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारा जीवन और हमारी भावनाएं हैं। मातृभाषा उतनी ही पवित्र है, जितनी अपनी मां।” उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि दुनिया में संवाद के लिए कई भाषाएं हो सकती हैं, लेकिन हमारे लिए तमिल सिर्फ एक ध्वनि या बातचीत का जरिया नहीं है। यह हमारी पहचान और हमारे अस्तित्व का आधार है।
गीत का ऐतिहासिक महत्व
तमिल थाई वाज्थू का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली है। मुख्यमंत्री विजय ने सदन को इसके इतिहास की याद दिलाते हुए बताया कि साल 1891 में प्रसिद्ध लेखक मनोन्मणियम सुंदरनार ने एक नाटक लिखा था। इस नाटक के ‘पायिरम’ यानी प्रस्तावना में इस गीत को शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री ने इस गीत की तुलना भारत के माथे पर लगे तिलक से की, जो तमिलनाडु को एक विशेष गौरव प्रदान करता है।
राज्य में इस गीत के आधिकारिक सफर को देखें तो इसके मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं:
| वर्ष/तारीख | ऐतिहासिक घटनाक्रम |
|---|---|
| 1891 | लेखक मनोन्मणियम सुंदरनार के नाटक की प्रस्तावना में इस गीत को पहली बार शामिल किया गया। |
| 23 नवंबर 1970 | तमिलनाडु में सरकारी समारोहों के दौरान इस गीत को प्रमुखता से गाने की शुरुआत हुई। |
| 17 दिसंबर 2021 | राज्य सरकार ने इसे आधिकारिक तौर पर तमिलनाडु के ‘राज्य गीत’ का दर्जा दिया। |
फैसले के पीछे की वजह
तमिलनाडु सरकार का यह त्वरित फैसला अचानक नहीं आया है। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक सलाह भेजी थी। इस सलाह में गृह मंत्रालय ने अपने 28 जनवरी के पुराने निर्देश का सख्ती से पालन करने को कहा था। उस निर्देश में स्पष्ट किया गया था कि सभी आधिकारिक और सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान शुरू होने से पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का गायन किया जाना चाहिए।
इस केंद्रीय निर्देश के बाद तमिलनाडु सरकार ने अपनी क्षेत्रीय पहचान और भाषाई स्वायत्तता को मजबूत करने के लिए विधानसभा में यह जवाबी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने स्पष्ट किया कि भारतीय संघीय व्यवस्था के भीतर रहते हुए अपनी संस्कृति की रक्षा करना राज्य का अधिकार है। राज्य सरकार का मानना है कि ‘तमिल थाई वाज्थू’ को अनिवार्य करने से राज्य की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी रहेगी।
आगे की राह
इस नए कानून को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए प्रशासन अब विस्तृत नियमावली तैयार कर रहा है। विधानसभा में सभी दलों की सहमति मिलने के बाद इसे लागू करने में कोई प्रशासनिक बाधा नहीं आएगी। राज्य के शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभाओं में इस गीत को शामिल करना सुनिश्चित करें। इस फैसले ने न केवल तमिलनाडु की राजनीति बल्कि केंद्र और राज्य के भाषाई संबंधों पर भी एक नई बहस शुरू कर दी है।







