नई दिल्ली,अंग भारत। लोकसभा ने बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिया। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस नए संशोधन विधेयक को सदन के पटल पर विचार और पारित कराने के लिए पेश किया था। इस नए कानून का प्राथमिक उद्देश्य देश के भीतर क्रिटिकल मिनरल्स (सामरिक रूप से जरूरी खनिजों) की खोज को तेज करना और भारतीय खनन उद्योग को वैश्विक निवेशकों के अनुकूल बनाना है। लोकसभा से मंजूरी मिलने के तुरंत बाद ही सदन की कार्यवाही को अगले दिन यानी 13 अगस्त की सुबह 11:00 बजे तक के लिए टाल दिया गया। यह नया मसौदा देश के पुराने ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957’ की जगह लेगा और उसमें जरूरी सुधार लागू करेगा।
विधेयक के मुख्य उद्देश्य
भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना होगा। ये खनिज केवल तकनीकी विकास के लिए ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने के लिए भी बेहद जरूरी हैं। लिथियम, कोबाल्ट, तांबा, निकल और नियोडिमियम जैसे खनिज मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सोलर पैनल और रक्षा उपकरणों के निर्माण में बुनियादी आधार प्रदान करते हैं। अब तक भारत इन खनिजों की आपूर्ति के लिए काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर रहा है। इस निर्भरता को कम करने के लिए ही इस नए विधेयक के जरिए घरेलू स्तर पर खनन गतिविधियों को बढ़ावा देने का रास्ता साफ किया गया है।
कानून में किए गए ये संशोधन देश की आर्थिक नीतियों में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि खोज और खनन की प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निजी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा दिया जाए। नए नियमों के तहत अब खोज लाइसेंस (Exploration License) देने की प्रक्रिया को काफी लचीला और आसान बनाया जा रहा है ताकि देश और दुनिया के बड़े खनन विशेषज्ञ भारत में पूंजी निवेश कर सकें।
- लिथियम: इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाला तत्व।
- कोबाल्ट और निकल: ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और टिकाऊ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए बुनियादी जरूरत।
- तांबा: बिजली के बुनियादी ढांचे, ट्रांसमिशन लाइनों और औद्योगिक मोटरों के लिए जरूरी धातु।
निवेश और निजी भागीदारी
पुराने ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957’ में कई ऐसी प्रशासनिक बाधाएं थीं, जिनकी वजह से बड़े निवेशक और विदेशी कंपनियां भारत के खनन क्षेत्र में कदम रखने से हिचकिचाती थीं। पहले जटिल स्वीकृतियां और लंबी प्रक्रियाएं खनन प्रोजेक्ट्स में देरी का कारण बनती थीं। नए संशोधन विधेयक, 2026 के माध्यम से सरकार ने इन रुकावटों को दूर करने का प्रयास किया है। अब निवेशकों को काम शुरू करने के लिए अनुकूल माहौल मिलेगा, जिससे देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इस संशोधन के तहत किए गए बदलावों को इस सारणी के माध्यम से बेहतर समझा जा सकता है:
| प्रावधान की श्रेणी | पुराना नियम (1957 अधिनियम) | नया नियम (2026 संशोधन) |
|---|---|---|
| निजी क्षेत्र की भागीदारी | सीमित भागीदारी और कठिन नियम | सरल प्रक्रिया और बड़े अवसर |
| लाइसेंस आवंटन | लंबा समय और प्रशासनिक उलझनें | पारदर्शी नीलामी और त्वरित मंजूरी |
| रणनीतिक खनिज खोज | केवल चुनिंदा सरकारी उपक्रमों तक सीमित | निजी खोजकर्ताओं को विशेष प्रोत्साहन |
इस तालिका से साफ होता है कि सरकार भारत में खनन क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इससे देश के संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल हो सकेगा और देश का पैसा बाहर जाने से बचेगा।
संसद में तीखी बहस
इस कानून को संसद में पारित कराने की प्रक्रिया आसान नहीं रही। लोकसभा में जब केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इसे चर्चा के लिए पेश किया, तो विपक्ष ने कई मुद्दों पर जबरदस्त हंगामा शुरू कर दिया। विपक्षी सांसदों के शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण विधेयक पर कोई गंभीर या विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। सरकार ने राष्ट्रीय हित और देश की खनिज सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए इस विधेयक को बिना किसी देरी के ध्वनि मत से पास कराने का फैसला किया।
“देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रणनीतिक खनिजों की खोज और खनन में तेजी लाना समय की मांग है। नया कानून निवेशकों को भरोसा देगा और देश में तकनीक के विकास को नई ताकत देगा।”
विपक्ष का आरोप था कि इतने बड़े बदलाव वाले कानून को बिना बहस के पारित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है। दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष का तर्क था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और औद्योगिक विकास से जुड़े इस कानून को लंबे समय तक लटका कर नहीं रखा जा सकता था। लोकसभा की कार्यवाही को इस हंगामे के चलते स्थगित करना पड़ा, जिससे अन्य विधायी कार्यों पर भी असर पड़ा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में राज्यसभा में इस विधेयक को लेकर क्या रुख रहता है और यह नया कानून जमीन पर किस प्रकार लागू होता है।







