भागलपुर,अंग भारत। नवगछिया अनुमंडल में गंगा और कोसी के जलस्तर में शनिवार को मामूली कमी जरूर आई है, लेकिन बाढ़ और कटाव का खतरा अभी भी बना हुआ है। दोनों नदियां अब भी उफान पर हैं और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और तटबंधों की सुरक्षा के लिए जरूरी काम तेज कर दिए गए हैं।
इस्माईलपुर-बिंद टोली में गंगा खतरे के निशान से ऊपर
प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्माईलपुर-बिंद टोली में गंगा नदी खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर में थोड़ी गिरावट के बावजूद नदी का दबाव अब भी काफी ज्यादा है। खासकर प्रमुख संवेदनशील तटबंधों के ‘टो’ पर पानी का दबाव बना हुआ है।जलस्तर और दबाव को देखते हुए तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। विभागीय टीमें मौके पर मौजूद हैं और किसी भी तरह की स्थिति से निपटने की तैयारी में जुटी हैं।
राघोपुर में कटाव से ग्रामीणों में डर
राघोपुर इलाके में बाढ़ के साथ कटाव ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। नदी का किनारा लगातार कट रहा है और कई जगह कृषि योग्य जमीन पानी में समा रही है। कुछ घरों पर भी कटाव का खतरा मंडरा रहा है।नदी के लगातार कटाव से ग्रामीणों में डर का माहौल है। लोगों को आशंका है कि अगर कटाव इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में कई और घर और खेत इसकी चपेट में आ सकते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के बढ़ते दबाव के कारण रात के समय खास तौर पर चिंता बनी रहती है। ग्रामीण लगातार प्रशासन से कटाव रोकने के लिए ठोस इंतजाम की मांग कर रहे हैं।
कोसी का जलस्तर भी खतरे के करीब
गंगा के साथ कोसी नदी ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मदरौनी और जेबी चोरहर इलाके में कोसी का जलस्तर खतरे के निशान के काफी करीब पहुंच गया है। इससे इन इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।गंगा और कोसी दोनों नदियों के उफान पर रहने से नवगछिया के कई तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
अगले 24 से 48 घंटे अहम
जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, अगले 24 से 48 घंटे नवगछिया और आसपास के संवेदनशील इलाकों के लिए काफी अहम हैं। नदियों के जलस्तर और तटबंधों पर पड़ रहे दबाव की लगातार निगरानी की जा रही है।संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षात्मक कार्य भी तेज कर दिए गए हैं। अभियंताओं और विभागीय कर्मचारियों की टीमें तटबंधों का जायजा ले रही हैं। जहां जरूरत पड़ रही है, वहां बचाव और सुरक्षा से जुड़े काम किए जा रहे हैं।
लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह
प्रशासन की ओर से बाढ़ और कटाव प्रभावित इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें।फिलहाल जलस्तर में मामूली गिरावट से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है और कोसी भी खतरे के करीब है। ऐसे में अगले दो दिनों में नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव नवगछिया की स्थिति के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







