भागलपुर,अंग भारत। लगातार बारिश और गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गोपालपुर प्रखंड में ब्रह्मोत्तर बांध की सुरक्षा को लेकर जल संसाधन विभाग सक्रिय हो गया है। बारिश के कारण बांध के कुछ हिस्सों में हुए कटाव को देखते हुए मरम्मत का काम तेज कर दिया गया है। विभाग की टीम संवेदनशील जगहों पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत के मुताबिक फ्लड फाइटिंग का काम भी कराया जा रहा है।
सीओ ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
गोपालपुर के अंचलाधिकारी रौशन कुमार ने शनिवार को ब्रह्मोत्तर बांध का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बांध की मौजूदा स्थिति को देखा और उन जगहों की जानकारी ली, जहां कटाव का खतरा ज्यादा है।मौके पर मौजूद जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता संजीव कुमार से सीओ ने चल रहे फ्लड फाइटिंग और मरम्मत कार्य के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बांध की लगातार निगरानी की जाए और जहां भी किसी तरह की कमजोरी या कटाव दिखाई दे, वहां बिना देरी किए जरूरी काम कराया जाए।
कटाव वाले हिस्सों की हो रही मरम्मत
सीओ रौशन कुमार ने बताया कि पूरे बांध पर नजर रखी जा रही है। जिन स्थानों पर कटाव हुआ है या जहां बांध को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत महसूस हो रही है, वहां जल संसाधन विभाग की ओर से तत्काल मरम्मत कराई जा रही है।गंगा का जलस्तर बढ़ने के बीच बांध पर मरम्मत शुरू होने से आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लोगों को डर था कि अगर कटाव बढ़ा और समय पर इसे नहीं रोका गया तो बाढ़ की स्थिति में परेशानी और बढ़ सकती है।
स्पर 8 और 9 के बीच फिर अतिक्रमण का मामला
निरीक्षण के दौरान इस्माइलपुर-बिंट टोली बांध के स्पर संख्या 8 और 9 के बीच दोबारा अतिक्रमण किए जाने का मामला भी सामने आया। इसको लेकर अधिकारियों से सवाल किया गया।सीओ रौशन कुमार ने कहा कि अगर बांध पर दोबारा अतिक्रमण हुआ है तो उसे जल्द हटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी प्रशासन की ओर से बांध को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया था।बांध जैसे संवेदनशील इलाके में दोबारा अतिक्रमण होने से प्रशासन के सामने नई परेशानी खड़ी हो सकती है। बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्य के लिए बांध और उसके आसपास का रास्ता खाली रहना बेहद जरूरी होता है।
पिछले साल भी अतिक्रमण से बढ़ी थी परेशानी
पिछले साल बाढ़ के दौरान बांध पर बने अवैध घरों और किए गए अतिक्रमण के कारण राहत और बचाव कार्य में प्रशासन और जल संसाधन विभाग को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। कई जगह रास्ता बाधित होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरी काम करने में भी दिक्कत आई थी।इसी अनुभव को देखते हुए इस बार प्रशासन पहले से ही सतर्क है। जिला आपदा प्रबंधन शाखा और जल संसाधन विभाग की ओर से अतिक्रमण हटाने को लेकर पहले ही पत्र जारी किया जा चुका है।
समय रहते अतिक्रमण हटाना जरूरी
प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण बांध पर दबाव बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ दोबारा अतिक्रमण की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। अगर समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो बाढ़ या किसी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है।फिलहाल जल संसाधन विभाग ने बांध की निगरानी बढ़ा दी है और कटाव वाले हिस्सों में मरम्मत का काम जारी है। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ का दबाव बढ़ने से पहले बांध को कमजोर स्थानों पर मजबूत कर लिया जाए, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।







