पटना,अंग भारत। बिहार में अब बीमारी गंभीर होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। लोगों की बीमारी समय रहते पकड़ने और इलाज शुरू करने के लिए बुधवार से राज्यव्यापी ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान शुरू किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में सभी 38 जिलों के लिए जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सरकार का लक्ष्य करीब छह करोड़ लोगों की स्वास्थ्य जांच कर उनका डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करना है।
30 साल से अधिक उम्र वालों की होगी जांच
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य बीमारी को गंभीर होने से पहले पहचानना है। उन्होंने लोगों से अपनी जांच कराने की अपील करते हुए कहा कि समय पर बीमारी का पता चलने से इलाज आसान और ज्यादा प्रभावी होता है।अभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की खास तौर पर स्क्रीनिंग की जाएगी। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों की प्राथमिक जांच करेंगे और जरूरत के अनुसार सलाह भी देंगे। अगर किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण मिलते हैं तो उसे आगे की जांच और इलाज के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर, अनुमंडल अस्पताल या जिला अस्पताल भेजा जाएगा।
घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम
इस अभियान के दौरान लोगों को इलाज के लिए अस्पताल आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लोगों तक पहुंचकर उनकी जांच करेंगी। इससे ऐसे लोगों की भी पहचान हो सकेगी, जिन्हें बीमारी के शुरुआती लक्षण तो हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक जांच नहीं कराई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ परिवार ही खुशहाल परिवार होता है। जब लोग स्वस्थ रहेंगे, तभी बिहार के विकास को भी गति मिलेगी। उन्होंने बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सहित परिवार के हर सदस्य के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
जिला अस्पतालों में बढ़ी सर्जरी
सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है। इसका असर जिला अस्पतालों में होने वाली सर्जरी पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि जून में जिला अस्पतालों में 2,428 ऑपरेशन हुए थे। अब यह संख्या बढ़कर 8,000 से अधिक हो गई है।उन्होंने कहा कि जिला और अनुमंडल अस्पतालों में पहले 36 तरह की सर्जरी की सुविधा थी। अब इसे बढ़ाकर 45 तरह की सर्जरी कर दिया गया है। इससे मरीजों को अपने जिले या आसपास ही इलाज मिलने की सुविधा बढ़ी है।
एक करोड़ लोगों की एनीमिया जांच
राज्य में एनीमिया की पहचान के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत करीब एक करोड़ लोगों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि समय पर एनीमिया की पहचान होने से जरूरी उपचार शुरू किया जा सकेगा।इसके साथ ही पूरे राज्य में करीब छह करोड़ लोगों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग कर डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने की योजना है। इससे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी एक जगह उपलब्ध रहने में मदद मिलेगी।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होंगे बेहतर
मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ‘मिशन कायाकल्प’ शुरू करने की बात कही। इसके तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्वास्थ्य उपकेंद्रों की व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा।सरकार का उद्देश्य है कि लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर के अस्पतालों का रुख न करना पड़े। गांव और आसपास के इलाकों में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
नर्सिंग छात्रों को विदेशी भाषाओं की ट्रेनिंग
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पताल और मशीनें बढ़ाने के साथ प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना भी जरूरी है। इसी को देखते हुए नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी।इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
30 नवंबर तक चलेगा अभियान
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को अभियान की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि तय लक्ष्य समय पर पूरा किया जाए और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिले।‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान 2 सितंबर से शुरू होकर 30 नवंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान घर-घर स्वास्थ्य जांच, लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह और जरूरत पड़ने पर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री निशांत और स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि भी मौजूद रहे।







