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चार गांवों में धूमधाम से मनेगा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव, दो सौ साल पुरानी है परंपरा

पूर्णिया के मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के लिए तैयार की जा रही भगवान कृष्ण की सुंदर मूर्तियां और सजे हुए पंडाल

बड़हरा कोठी, पूर्णिया,अंग भारत। प्रखंड क्षेत्र के मौजमपट्टी, सुखसेना, बड़हरी और मलडीहा गांव स्थित श्रीकृष्ण मंदिरों में श्रीश्री 108 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव-2026 को लेकर तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के निर्माण का काम अंतिम चरण में है। महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में साफ-सफाई और सजावट का काम भी शुरू कर दिया गया है।

4 सितंबर की रात होगा जन्मोत्सव

ग्रामीणों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन शाम से मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू होगी। इसके बाद रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा की जाएगी। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन करेंगे और पूजा-अर्चना में शामिल होंगे।जन्माष्टमी के मौके पर ग्रामीणों की ओर से भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया जाएगा। देर रात तक मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल बना रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण भी किया जाएगा।

दो दिन लगेगा मेला, सजने लगीं दुकानें

जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर के आसपास दो दिवसीय मेले का आयोजन भी किया जाता है। मेले को लेकर दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजानी शुरू कर दी हैं। मंदिर के आसपास झूले, चाट-पकौड़े, आइसक्रीम और खाने-पीने की अन्य दुकानें लगने लगी हैं।बच्चों के लिए मेले में झूले और मनोरंजन के दूसरे साधन आकर्षण का केंद्र रहेंगे। वहीं, ग्रामीण परिवार के साथ मेले में पहुंचकर पूजा-अर्चना के बाद खरीदारी और मनोरंजन का आनंद लेते हैं। मेले को लेकर आसपास के गांवों के लोगों में भी उत्साह बना हुआ है।

मनोकामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु

ग्रामीणों के अनुसार, श्रीकृष्ण मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। लोग भगवान श्रीकृष्ण के दरबार में पुत्र रत्न और अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना लेकर पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सच्चे मन से भगवान की पूजा करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है।मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा मंदिर पहुंचकर भगवान को भोग अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण को बांसुरी भी चढ़ाते हैं। जन्माष्टमी के दौरान मंदिर में ऐसे श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक रहती है।

दो सौ साल पुरानी है प्रतिमा बनाने की परंपरा

ग्रामीणों ने बताया कि इन मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर प्रतिमा निर्माण की परंपरा करीब दो सौ वर्षों से चली आ रही है। हर वर्ष इसी परंपरा के अनुसार पिंडी पर भगवान श्रीकृष्ण, माता यशोदा, माता देवकी, भगवान गणेश और वासुदेव की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं।इस वर्ष भी पारंपरिक तरीके से प्रतिमाओं का निर्माण कराया जा रहा है। प्रतिमा निर्माण का काम अंतिम दौर में पहुंच चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा को आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है।

माखन-मिश्री और बतासे का लगेगा भोग

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री और बतासे का भोग लगाया जाएगा। पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान को विभिन्न प्रकार के प्रसाद भी अर्पित करेंगे। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन होगा।ग्रामीणों ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष आरती की जाएगी। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद बांटा जाएगा। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक गतिविधियां चलती रहेंगी।

6 सितंबर को होगा प्रतिमा विसर्जन

महोत्सव के बाद 6 सितंबर की शाम प्रतिमाओं का जल प्रवाह कर विसर्जन किया जाएगा। विसर्जन को लेकर भी ग्रामीणों की ओर से तैयारी की जा रही है। जन्माष्टमी से लेकर विसर्जन तक मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजन और मेले का माहौल बना रहेगा।महोत्सव को लेकर ग्रामीणों की ओर से मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित करने का काम चल रहा है। आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीण जुटे हुए हैं। दो सौ साल पुरानी परंपरा के कारण इस महोत्सव को लेकर स्थानीय लोगों में खास उत्साह है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लेंगे।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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