भागलपुर,अंग भारत। जिले के हबीबपुर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 2 स्थित करोड़ी बाजार में सड़क की बदहाली ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाके में रास्ते की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अब ग्रामीणों ने सरकारी मदद का इंतजार छोड़कर खुद ही सड़क को चलने लायक बनाने का काम शुरू कर दिया है। स्थानीय लोग ईंटों के टुकड़े जुटाकर सड़क पर बिछा रहे हैं, ताकि कीचड़ और पानी के बीच कम से कम पैदल आने-जाने का रास्ता बनाया जा सके।
बारिश के बाद सड़क बनी कीचड़ का तालाब
करोड़ी बाजार की सड़क की हालत पहले से ही खराब थी, लेकिन हाल में हुई बारिश के बाद समस्या और गंभीर हो गई। सड़क पर जगह-जगह जलजमाव हो गया है और पूरा रास्ता कीचड़ में बदल गया है। कई जगह गड्ढों में पानी भर गया है। ऐसे में पैदल चलना भी लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार जलजमाव के कारण इलाके में गंदगी बढ़ रही है। इससे मच्छरों के पनपने और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है, लेकिन खराब सड़क के कारण हर दिन उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने खुद उठाई जिम्मेदारी
जब लंबे समय तक सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो ग्रामीणों ने खुद ही रास्ता बनाने का फैसला किया। स्थानीय लोग ईंट के टुकड़े जुटाकर सड़क के गड्ढों और कीचड़ वाले हिस्सों में बिछा रहे हैं। उनका कहना है कि उनका मकसद सड़क का स्थायी निर्माण करना नहीं, बल्कि फिलहाल आने-जाने लायक रास्ता तैयार करना है।मोहम्मद आजाद, मोहम्मद साबिर और बीबी अंगूरी समेत कई ग्रामीण खुद हाथों में ईंटें लेकर सड़क पर काम करते नजर आए। लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि सड़क की स्थिति सुधारने के लिए आगे नहीं आए तो उन्हें मजबूरी में खुद यह कदम उठाना पड़ा।
कई बार शिकायत, फिर भी नहीं हुआ काम
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की समस्या को लेकर कई बार नगर पंचायत के मुख्य पार्षद और वार्ड सदस्य से शिकायत की जा चुकी है। लोगों ने मौखिक रूप से अपनी परेशानी बताने के साथ लिखित शिकायत भी दी है। हर बार जल्द समस्या दूर कराने का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक सड़क की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान समस्या और बढ़ जाती है। पानी निकलने की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़क लंबे समय तक जलमग्न रहती है। इससे लोगों को अपने घरों तक पहुंचने में भी परेशानी होती है।
बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
बदहाल सड़क के कारण सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। बच्चों को स्कूल जाने के दौरान कीचड़ और पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार फिसलने के कारण बच्चे गिर जाते हैं। बुजुर्गों के लिए गड्ढों और फिसलन भरे रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर बने गड्ढों के कारण लोग कई बार फिसलकर गिर चुके हैं। दोपहिया वाहन चलाने वालों के लिए भी यह रास्ता जोखिम भरा बना हुआ है। रात के समय परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि पानी और कीचड़ के बीच गड्ढों का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बढ़ रहा आक्रोश
सड़क की बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों में नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के लिए उन्हें खुद संघर्ष करना पड़ रहा है।लोगों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए ग्रामीणों को अपने स्तर पर ईंटें बिछानी पड़ रही हैं, यह जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
पक्की सड़क नहीं बनी तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि वे अब सिर्फ आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। उनकी मांग है कि करोड़ी बाजार की सड़क का जल्द से जल्द पक्का निर्माण कराया जाए और जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ तो वे जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा खुद ईंटें बिछाकर रास्ता तैयार करने की तस्वीर इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और यह सवाल भी खड़ा कर रही है कि जब लोगों को अपनी सड़क खुद बनानी पड़े, तो विकास के सरकारी दावों का वास्तविक असर जमीन पर कितना है।







