Founder – Mohan Milan

कटाव की चपेट में कई आशियाने जमींदोज, अपना घर खुद तोड़ने को मजबूर बेबस ग्रामीण

भागलपुर,अंग भारत। गंगा नदी के तेज कटाव ने भागलपुर जिले के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नदी की तेज धार के साथ लगातार हो रहे भू-कटाव से कई गांवों में दहशत का माहौल है। पिछले 72 घंटों में मंदरोनी, इंग्लिश फरका और माशारू गांवों में दर्जनों मकान देखते ही देखते गंगा में समा गए। जिन परिवारों के घर अभी बचे हुए हैं, वे भी सुरक्षित नहीं हैं। लोग अपने हाथों से घर तोड़कर सामान बाहर निकाल रहे हैं, ताकि कम से कम जरूरी चीजें बचाई जा सकें।

देखते ही देखते गंगा में समा रहे मकान

कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि ग्रामीणों को संभलने तक का मौका नहीं मिल रहा है। कई जगह पक्के मकानों की दीवारें अचानक भरभराकर गिर रही हैं। देखते ही देखते मकान का बड़ा हिस्सा नदी की तेज धारा में चला जा रहा है। कुछ परिवारों ने खतरा बढ़ता देख घर खाली कर दिया है, जबकि कई लोग अभी भी अपने घरों से जरूरी सामान निकालने में जुटे हैं।ग्रामीणों के लिए सबसे दर्दनाक स्थिति यह है कि जिस घर को बनाने में उनकी पूरी जिंदगी की कमाई लगी, उसे अब वे खुद तोड़ रहे हैं। लोग हथौड़ा और दूसरे औजार लेकर दीवारें गिरा रहे हैं। इसके बाद ईंट, लकड़ी, दरवाजे, खिड़की और घर में रखा जरूरी सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

आंखों के सामने उजड़ रही जिंदगी

कटाव प्रभावित गांवों में हालात बेहद खराब हैं। जिन परिवारों के घर नदी में समा गए हैं, उनके सामने अब रहने की समस्या खड़ी हो गई है। महिलाएं अपने उजड़े घर और सामान को देखकर रो रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवार सुरक्षित जगह की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और अपनी कमाई से घर बनाया था। किसी ने घर बनाने के लिए पैसे जोड़े तो किसी ने खेती और मजदूरी से एक-एक रुपया बचाया। अब गंगा की तेज धार के सामने उनकी सारी मेहनत खत्म होती दिखाई दे रही है।

प्रशासन के खिलाफ बढ़ रहा आक्रोश

कटाव की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग के खिलाफ नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कटाव की गंभीर स्थिति की जानकारी पहले से थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।लोगों का कहना है कि यदि पहले से बचाव कार्य तेज किया जाता तो शायद स्थिति इतनी खराब नहीं होती। ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ निरोधक कार्य कई जगह सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रहे। अब जब नदी तेजी से जमीन काट रही है, तब लोगों के पास अपने घर बचाने का कोई रास्ता नहीं बचा है।

कई और गांवों पर मंडरा रहा खतरा

गंगा के कटाव की रफ्तार ने आसपास के दूसरे गांवों के लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। ग्रामीणों को डर है कि अगर जल्द कटाव पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में कई और रिहायशी इलाके इसकी चपेट में आ सकते हैं।लोगों की मांग है कि संवेदनशील इलाकों में तत्काल बड़े पैमाने पर बचाव कार्य शुरू किया जाए। कटाव रोकने के लिए जियो बैग्स और बोल्डर क्रेटिंग जैसी व्यवस्था करने की मांग भी उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब सिर्फ छोटे स्तर के काम से स्थिति संभलने वाली नहीं है।

मवेशियों के साथ पलायन को मजबूर परिवार

कटाव से प्रभावित परिवारों का पलायन भी तेज हो गया है। सैकड़ों लोग अपने मवेशियों और बचे-खुचे घरेलू सामान के साथ सुरक्षित और ऊंची जगहों की ओर जा रहे हैं। कई परिवार स्कूलों और राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास शरण ले रहे हैं।कई लोगों ने तिरपाल लगाकर अस्थायी ठिकाना बना लिया है। खुले आसमान के नीचे रात गुजारना उनकी मजबूरी बन गई है। बारिश के बीच छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ रहना परिवारों के लिए बड़ी चुनौती है।

बचा सामान समेटने में जुटे लोग

फिलहाल गांवों में सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों की है, जिनके मकान कटाव की जद में आ चुके हैं। लोग अपने घरों से अनाज, कपड़े, बर्तन, जरूरी कागजात और अन्य सामान निकालने में लगे हैं। कई परिवारों के पास इतना समय भी नहीं है कि वे घर का पूरा सामान सुरक्षित जगह पहुंचा सकें।ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान, रहने की व्यवस्था और कटाव रोकने के ठोस उपाय की जरूरत है। अगर गंगा की धार इसी तरह जमीन काटती रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों की निगाह अब प्रशासन की ओर है कि वह कटाव प्रभावित इलाकों में कितनी तेजी से राहत और बचाव का काम शुरू करता है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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