नई दिल्ली,अंग भारत। राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीत चुके भाला फेंक खिलाड़ी यशवीर सिंह को अपने करियर का बड़ा मौका मिला है। चोटिल नीरज चोपड़ा की जगह यशवीर को जापान में होने वाले आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय एथलेटिक्स टीम में शामिल किया गया है।
77 सदस्यीय टीम की घोषणा
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने गुरुवार को लुधियाना में प्रेस कांफ्रेंस कर 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले आइची-नागोया एशियाई खेलों के लिए 77 सदस्यीय भारतीय ट्रैक एवं फील्ड टीम की घोषणा की। यशवीर इस सत्र में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और भारतीय भाला फेंक में नीरज चोपड़ा के बाद प्रमुख खिलाड़ियों में अपनी जगह बना चुके हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों में जीता कांस्य
यशवीर ने ग्लासगो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 85.41 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता था। उन्होंने अपना सबसे अच्छा प्रयास छठे और अंतिम प्रयास में किया था।इस प्रदर्शन के साथ वह राष्ट्रमंडल खेलों में भाला फेंक का पदक जीतने वाले तीसरे भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने। उनसे पहले काशीनाथ नाइक ने 2010 में कांस्य पदक जीता था। नीरज चोपड़ा ने 2018 में स्वर्ण और 2026 में रजत पदक अपने नाम किया था।
इस सत्र में भी शानदार प्रदर्शन
यशवीर ने इस सत्र में भी अपनी निरंतरता बनाए रखी है। उन्होंने अब तक आठ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और छह प्रतियोगिताओं में 80 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंका है।पिछले महीने भुवनेश्वर में आयोजित भारतीय ओपन में उन्होंने 82.94 मीटर के प्रयास के साथ दूसरा स्थान हासिल किया था। यह भारत में आयोजित विश्व एथलेटिक्स सिल्वर लेवल कॉन्टिनेंटल टूर की पहली प्रतियोगिता थी। लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण एशियाई खेलों की टीम में उनका दावा मजबूत हुआ।
नीरज के रिकॉर्ड को भी तोड़ा था
भाला फेंक से जुड़े परिवार से आने वाले यशवीर पूर्व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी राय सिंह के बेटे हैं। उन्होंने घरेलू स्तर पर तब खास पहचान बनाई, जब भारतीय अंडर-20 फेडरेशन कप में उन्होंने नीरज चोपड़ा का प्रतियोगिता रिकॉर्ड तोड़ दिया था।अब नीरज के चोट के कारण एशियाई खेलों से बाहर होने के बाद यशवीर के सामने खुद को साबित करने का बड़ा मौका है। जापान में होने वाली प्रतियोगिता में वह बेहतर प्रदर्शन कर भारतीय भाला फेंक में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहेंगे।
अगली बड़ी ताकत बनने का मौका
यशवीर के लिए एशियाई खेल सिर्फ एक और प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने का बड़ा मंच होगा। इस सत्र में उनका प्रदर्शन और 80 मीटर से अधिक की लगातार थ्रो उनकी क्षमता को दिखाती है।अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नीरज की अनुपस्थिति में यशवीर बड़े मंच पर कैसा प्रदर्शन करते हैं। उनके पास राष्ट्रमंडल खेलों के पदक के बाद एशियाई खेलों में भी शानदार प्रदर्शन कर भारतीय एथलेटिक्स में अपनी जगह पक्की करने का मौका है।







