अगली पीढ़ी के नेटवर्क में साझा सुरक्षा, प्रतिस्पर्धा और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर जोर; जितिन प्रसाद ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव से की 6जी पर चर्चा
वाशिंगटन,अंग भारत। भारत अगली पीढ़ी के 6जी टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क के विकास को लेकर वैश्विक स्तर पर शुरू की गई एक अहम पहल में शामिल हो गया है। अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। विभाग के अनुसार भारत अब अमेरिका और 24 अन्य देशों के साथ उस ग्लोबल अलायंस का हिस्सा बन गया है, जिसका उद्देश्य भविष्य की 6जी तकनीक के विकास में सहयोग बढ़ाना और सुरक्षित तथा भरोसेमंद नेटवर्क तैयार करना है। इस पहल के जरिए साझा सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 6जी तकनीक में नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
अगली पीढ़ी के नेटवर्क को लेकर साथ आए देश
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए भारत के इस पहल में शामिल होने की घोषणा की। विभाग ने कहा कि भारत अमेरिका और 24 अन्य देशों के साथ उस प्रयास में शामिल हो गया है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगली पीढ़ी के टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क देशों की साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं के अनुरूप विकसित हों।अमेरिकी विभाग के मुताबिक, यह पहल केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है। इसके तहत 6जी नेटवर्क को सुरक्षित बनाने, वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने और नई तकनीकों में नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में मिलकर काम करने की योजना है।
जितिन प्रसाद और हॉवर्ड लटनिक की मुलाकात
6जी को लेकर यह पहल जी20 इनोवेशन मिनिस्टीरियल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच हुई महत्वपूर्ण बातचीत के बाद सामने आई। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भविष्य की 6जी तकनीक और इससे जुड़े अवसरों को लेकर चर्चा हुई।अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भी अपनी पोस्ट में इस बैठक का उल्लेख किया। विभाग ने बताया कि लटनिक ने जी20 इनोवेशन मिनिस्टीरियल के दौरान जितिन प्रसाद से 6जी के भविष्य पर चर्चा की।
चैपल हिल में हुआ जी20 इनोवेशन मिनिस्टीरियल
जितिन प्रसाद ने अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित चैपल हिल में एक और दो सितंबर को आयोजित जी20 इनोवेशन मिनिस्टर्स की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस बैठक की मेजबानी अमेरिकी वाणिज्य विभाग और व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी (ओएसटीपी) ने की।बैठक में दुनिया की तेजी से बदलती तकनीकी जरूरतों, नवाचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उभरती तकनीकों को लेकर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच विचार-विमर्श हुआ। इसी दौरान भारत और अमेरिका के बीच 6जी को लेकर सहयोग का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा।
सेमीकंडक्टर, एआई और डेटा सेंटर पर भी चर्चा
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के साथ बैठक के बाद जितिन प्रसाद ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि चर्चा का मुख्य केंद्र आधुनिक तकनीक के क्षेत्र की नींव रखने वाले महत्वपूर्ण सेक्टरों को आगे बढ़ाना था।प्रसाद ने कहा कि सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा सेंटर उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था के अहम आधार हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग और निवेश को बढ़ावा देना आने वाले समय में दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
6जी में भारत की बढ़ती भूमिका
6जी को मोबाइल और डिजिटल संचार की अगली पीढ़ी की तकनीक के तौर पर देखा जा रहा है। दुनिया के कई देश अभी से इसके मानकों, तकनीकी ढांचे और संभावित अनुप्रयोगों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में भारत का इस वैश्विक पहल में शामिल होना देश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।6जी के विकास में सुरक्षा, तेज कनेक्टिविटी, कम विलंबता, बड़े स्तर पर डेटा ट्रांसफर और नई डिजिटल सेवाओं की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, एआई और डेटा सेंटर जैसी तकनीकों का भी 6जी के भविष्य से सीधा संबंध माना जा रहा है।भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग के लिहाज से भी यह पहल महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच 6जी के साथ-साथ एआई, सेमीकंडक्टर और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं। ऐसे में 26 देशों की इस पहल में भारत की भागीदारी से वैश्विक 6जी विकास में उसकी भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है।







