Founder – Mohan Milan

नाथनगर में बाढ़ का तांडव, स्कूल डूबे, गांवों का संपर्क टूटा, घुटने भर पानी में जाने को मजबूर नौनिहाल

भागलपुर,अंग भारत। जिले के नाथनगर प्रखंड में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से प्रखंड की कई पंचायतों में पानी घुस गया है। कई गांवों की हालत ऐसी हो गई है कि वे चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू जैसे नजर आने लगे हैं। बेलखुरिया पंचायत का मध्य विद्यालय और भुवालपुर पंचायत का पुरानी सराय गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर गया है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

स्कूल परिसर में घुटने भर पानी, फिर भी पहुंच रहे बच्चे

बेलखुरिया पंचायत स्थित मध्य विद्यालय बेलखुरिया की स्थिति सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है। स्कूल परिसर में घुटने तक पानी जमा है और चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। इसके बावजूद बच्चे कंधे पर स्कूल बैग टांगकर इसी पानी से होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।बाढ़ के गंदे पानी से होकर छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल जाना किसी खतरे से कम नहीं है। पानी में गड्ढे, कीड़े-मकोड़े और संक्रमण का खतरा बना हुआ है। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। अगर इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो स्कूल भवन के अंदर भी पानी प्रवेश कर सकता है। लोगों को डर है कि बच्चों को स्कूल भेजने के दौरान कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

पुरानी सराय में घर से निकलना भी मुश्किल

उधर, भुवालपुर पंचायत के पुरानी सराय गांव की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। पूरा गांव बाढ़ के पानी से घिर चुका है। गांव की गलियों से लेकर मुख्य रास्तों तक कई फीट पानी जमा है। इससे लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है।पानी भर जाने के कारण गांव में वाहनों की आवाजाही लगभग पूरी तरह बंद हो गई है। जरूरी सामान लेने के लिए लोगों को पानी के बीच से पैदल ही गुजरना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी राशन, दूध और दवा जैसी जरूरी चीजें लाने में हो रही है।

बुजुर्गों और बीमार लोगों की बढ़ी परेशानी

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों पर पड़ रहा है। गांव में जलजमाव के कारण सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति को अचानक इलाज की जरूरत पड़ जाए तो उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना बड़ी चुनौती होगी। पानी के कारण सड़क संपर्क बाधित है और निजी वाहनों का गांव तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी

बाढ़ की स्थिति बिगड़ने के बावजूद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पानी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अब तक प्रभावित इलाकों में अधिकारियों की ओर से पर्याप्त सक्रियता नहीं दिखाई गई है।लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान प्रशासन को पहले से तैयारी रखनी चाहिए थी। प्रभावित गांवों में राहत सामग्री, नाव और जरूरी दवाओं की व्यवस्था समय रहते की जानी चाहिए थी। ग्रामीणों को डर है कि अगर पानी का स्तर और बढ़ा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्कूल में छुट्टी या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग

बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रभावित स्कूलों में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्कूल परिसर और रास्ते सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक बच्चों को पानी के बीच से स्कूल भेजना ठीक नहीं है।लोगों ने मांग की है कि या तो प्रभावित स्कूलों में पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए या फिर स्थिति सामान्य होने तक अवकाश घोषित किया जाए। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की जान जोखिम में डालकर पढ़ाई जारी रखना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

नाव और राहत शिविर की मांग

पुरानी सराय समेत पानी से घिरे दूसरे गांवों के लोगों ने सुरक्षित आवागमन के लिए सरकारी नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि नाव की व्यवस्था होने से कम से कम जरूरी सामान और मरीजों को सुरक्षित तरीके से बाहर लाया-ले जाया जा सकेगा।इसके साथ ही प्रभावित इलाकों में राहत शिविर शुरू करने की भी मांग की गई है। लोगों को राशन, पीने का साफ पानी, दवा और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने की जरूरत है।नाथनगर में लगातार बढ़ता पानी अब सिर्फ जलजमाव की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीणों के रोजमर्रा के जीवन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में लोगों की नजर अब प्रशासन की ओर है कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य कितनी जल्दी शुरू होता है और लोगों को इस संकट से कब राहत मिलती है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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