पूर्णिया,अंग भारत। जिला प्रशासन की ओर से शैक्षणिक संस्थानों की व्यवस्था को बेहतर बनाने और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार, 10 अक्टूबर को मरंगा स्थित दो आईटीआई का औचक निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश एवं मार्गदर्शन में सदर अनुमंडल पदाधिकारी विग्नेश टी.ए. ने गवर्नमेंट आईटीआई, मरंगा और गवर्नमेंट महिला आईटीआई, मरंगा का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं शैक्षणिक व्यवस्था का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने दोनों संस्थानों में उपलब्ध आधारभूत संरचनाओं, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति, शिक्षकों की उपस्थिति तथा छात्रावास की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संस्थानों के प्राचार्यों से विभिन्न व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की और आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की। निरीक्षण का उद्देश्य संस्थानों में शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन और विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति का आकलन करना था।इस दौरान एसडीएम ने संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, शैक्षणिक गतिविधियों और संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। विद्यार्थियों से संवाद के माध्यम से उनकी आवश्यकताओं और शैक्षणिक वातावरण से जुड़े विषयों को समझने का प्रयास किया गया।
युवाओं को नशे से दूर रहने का दिया संदेश
निरीक्षण के दौरान नशामुक्त भारत अभियान के प्रति जागरूकता पर भी जोर दिया गया। एसडीएम ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। युवाओं की ऊर्जा और उनकी सकारात्मक सोच समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में युवाओं को स्वयं नशे से दूर रहना चाहिए और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।कार्यक्रम के अंत में एसडीएम ने उपस्थित विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने तथा समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ दिलाई। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनने और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
शैक्षणिक व्यवस्था पर प्रशासन की नजर
जिला प्रशासन, पूर्णिया की ओर से शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, शिक्षण व्यवस्था और छात्र-छात्राओं के हितों से जुड़े विषयों की निगरानी की जा रही है। प्रशासन का जोर विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनमें सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच विकसित करने पर भी है।औचक निरीक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थानों की व्यवस्थाओं का जायजा लेने तथा युवाओं को नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।







