नई दिल्ली,अंग भारत। देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन राज्यों में सत्ता का परचम लहराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जेपी नड्डा और अमित शाह जैसे दिग्गज नेता सीधे मोर्चा संभाले हुए हैं। यह मुकाबला केवल सीटों का नहीं, बल्कि इन राज्यों में भाजपा की वैचारिक पैठ और विकास के विजन को साबित करने का है, जिसके लिए पार्टी लगातार ताबड़तोड़ रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के जरिए मतदाताओं को अपने पाले में लाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है।
असम में मोदी का मेगा प्रचार
असम की चुनावी जंग को भाजपा ने अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अपनी रैलियों का जाल बुन दिया है। उनकी रणनीति का मुख्य केंद्र बारपेटा, होजाई और डिब्रूगढ़ जैसे जिले हैं, जहां वे पार्टी की नीतियों को सीधे जनता तक पहुँचा रहे हैं। प्रधानमंत्री की सभाओं में उमड़ रही भीड़ इस बात का संकेत है कि भाजपा असम में अपनी जीत की लय को बरकरार रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
- बारपेटा में सुबह 11 बजे जनसभा।
- होजाई में दोपहर सवा एक बजे का संबोधन।
- डिब्रूगढ़ में शाम चार बजे शक्ति प्रदर्शन।
नड्डा की चुनावी सक्रियता
प्रधानमंत्री के अलावा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी असम में पार्टी के प्रचार अभियान को धार दे रहे हैं। तिनसुकिया और लखीमपुर में नड्डा की रैलियां स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने का काम कर रही हैं। यह स्पष्ट है कि भाजपा का पूरा ध्यान इस बार असम में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर है ताकि चुनावी नतीजों को अपने पक्ष में बदला जा सके।
दक्षिण में शाह की रणनीति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस समय केरल और पुडुचेरी में भाजपा की चुनावी रणनीति के मुख्य वास्तुकार के रूप में कार्य कर रहे हैं। भाजपा स्थापना दिवस के मौके पर तिरुवनंतपुरम में उनका संबोधन पार्टी के कैडर के लिए एक बड़ी प्रेरणा साबित हो रहा है। दक्षिण भारत के इन राज्यों में भाजपा के लिए अपनी पैठ बनाना एक बड़ी चुनौती है, जिसे अमित शाह अपने रोड शो और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
महत्वपूर्ण चुनावी आंकड़े
इन पांच राज्यों के चुनावी गणित को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि प्रत्येक राज्य की अपनी अलग चुनौतियां हैं। नीचे दी गई तालिका में मतदान की तारीखों और सीटों का विवरण दिया गया है:
| राज्य | कुल सीटें | मतदान तिथि |
|---|---|---|
| पश्चिम बंगाल | 294 | 23 और 29 अप्रैल |
| तमिलनाडु | 234 | 23 अप्रैल |
| केरल | 140 | 9 अप्रैल |
| असम | 126 | 9 अप्रैल |
| पुडुचेरी | 30 | 9 अप्रैल |
4 मई का इंतजार
सभी राज्यों की मतगणना 4 मई को होनी है। तब तक पूरा देश इन राज्यों की सियासी उठापटक पर नजरें गड़ाए बैठा है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जिस तरह से एक साथ पांच अलग-अलग दिशाओं में अपनी ताकत लगा रहा है, उससे यह साफ झलकता है कि पार्टी चुनावी रणभूमि में जीत हासिल करने के लिए हर एक छोटे बदलाव को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रही है।
अमित शाह के दौरे का मुख्य उद्देश्य न केवल दक्षिण भारत में पार्टी का जनाधार बढ़ाना है, बल्कि वहां के मतदाताओं को भाजपा के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र से जोड़ना भी है।
आने वाले दिन यह तय करेंगे कि किसका प्रचार अभियान जनता के दिलों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा। क्या भाजपा इन राज्यों में अपने दम पर बड़ा उलटफेर कर पाएगी? यह बड़ा सवाल हर किसी की जुबान पर है। अभी फिलहाल मैदान में दिग्गज नेताओं की भागदौड़ और जनता के बीच बढ़ती राजनीतिक हलचल ने माहौल को रोमांचक बना दिया है।








