राजगीर,अंग भारत। विदेश मंत्रालय की जन-केंद्रित पहल ‘पासपोर्ट सेवा-आपके द्वार पर पासपोर्ट’ के अंतर्गत हाल ही में नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में एक दिवसीय मोबाइल वैन शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का सीधा उद्देश्य छात्रों, शोधार्थियों और विश्वविद्यालय कर्मियों को पासपोर्ट बनवाने की भागदौड़ से मुक्ति दिलाना था। अब उन्हें पासपोर्ट कार्यालय के चक्कर लगाने के बजाय अपने ही शैक्षणिक परिसर में सारी सुविधाएँ एक साथ मिल गई हैं, जिससे उनका बहुमूल्य समय और यात्रा का खर्च दोनों बचा है।
परिसर में आसान सुविधा
आमतौर पर पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया किसी भी व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, विशेषकर उन छात्रों के लिए जो अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, पटना द्वारा आयोजित इस मोबाइल वैन शिविर ने इस समस्या का स्थायी समाधान पेश किया है। इस शिविर में वे सभी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं, जो एक सामान्य पासपोर्ट सेवा केंद्र में होती हैं:
- दस्तावेजों का गहन सत्यापन।
- आवेदकों का बायोमेट्रिक डेटा संग्रहण (उंगलियों के निशान और फोटोग्राफी)।
- पासपोर्ट आवेदन पत्र का औपचारिक जमाव।
- एप्लीकेशन की स्टेटस ट्रैकिंग से जुड़ी जानकारी।
55 लोगों को लाभ
इस शिविर में कुल 55 लाभार्थियों ने हिस्सा लिया। आंकड़ों के नजरिए से देखें तो यह संख्या भले ही छोटी लगे, लेकिन इसका प्रभाव गहरा है। इनमें से अधिकांश वे छात्र हैं जो भविष्य में शोध कार्य, अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, या उच्च शिक्षा के लिए विदेशों का रुख करने की योजना बना रहे हैं। बिना किसी अतिरिक्त झंझट के, पासपोर्ट सेवा का उनके द्वार तक पहुंचना, डिजिटल इंडिया की एक मजबूत तस्वीर पेश करता है।
आयोजन का उद्देश्य
इस पहल का उद्घाटन भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज तथा नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से किया। उनका मानना है कि शिक्षा और ग्लोबल एक्सपोजर के बीच की दूरी को मिटाने के लिए सरकारी सेवाओं का डिजिटल और सुलभ होना जरूरी है। सिबी जॉर्ज ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता युवाओं को वैश्विक नागरिक के रूप में तैयार करने की है, जिसके लिए जरूरी कागजी कार्रवाई अब बाधा नहीं बनेगी।
क्यों जरूरी है पहल
| सुविधा | पहले की स्थिति | वर्तमान सुधार |
|---|---|---|
| यात्रा | पासपोर्ट कार्यालय की लंबी दौड़ | परिसर में ही सेवा उपलब्ध |
| समय | पूरा दिन बर्बाद | कुछ ही मिनटों में प्रक्रिया पूर्ण |
| सुगमता | जटिल प्रक्रिया | सहज और सीधी प्रक्रिया |
छात्रों में उत्साह
शिविर के दौरान छात्रों के बीच जो उत्साह दिखा, वह वाकई काबिले तारीफ था। कई शोध छात्रों ने साझा किया कि उन्हें अक्सर अपने प्रोजेक्ट्स के लिए दूसरे देशों की यात्रा करनी पड़ती है। पहले पासपोर्ट रिन्यूअल या फ्रेश आवेदन के लिए उन्हें पटना जाना पड़ता था, जिसमें एक पूरा दिन खराब हो जाता था। अब, यह मोबाइल वैन उनके लिए एक वरदान की तरह साबित हुई है। यह केवल एक सेवा नहीं, बल्कि छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का जरिया भी है।
सरकार का नया रुख
नालंदा विश्वविद्यालय और विदेश मंत्रालय का यह आपसी तालमेल इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक स्तर पर अब ‘जन-केंद्रित’ (Citizen-Centric) दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। ऐसे शिविर केवल नालंदा तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि अन्य बड़े शिक्षण संस्थानों में भी इनका विस्तार होना चाहिए। यह न केवल पासपोर्ट सेवाओं को सुगम बनाता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता को भी बढ़ाता है। भविष्य में इस तरह के आयोजनों से सरकारी सेवाओं और आम नागरिकों के बीच का फासला और कम होगा, जिससे युवाओं का विकास पथ प्रशस्त होगा।








