Founder – Mohan Milan

नौ कुंडीय हयात्री महायज्ञ से घनुआं गांव में धार्मिक माहौल

फुल्लीडुमर/बांका/अंगभारत। प्रखंड के खेसर बाजार से सटे घनुआं गांव में आयोजित नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ सह प्रज्ञा महापुराण कथा ने पूरे इलाके को अध्यात्म और लोक-आस्था के एक नए केंद्र में बदल दिया है। इस महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य जन-मानस में नैतिक मूल्यों का संचार करना और समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा देना है, जिससे स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक चेतना का संचार हो रहा है। आज के दौर में जब लोग अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं, तब इस तरह के आयोजन सामुदायिक एकता का एक मजबूत सेतु बनकर उभरे हैं।

आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह

यज्ञ स्थल पर बजते हुए मंत्रों की ध्वनि और कुंडों से उठती हुई आहुति की गंध एक दिव्य वातावरण का निर्माण कर रही है। शांति कुंज, हरिद्वार से आए विद्वान संतों के मार्गदर्शन में हो रहे ये अनुष्ठान वैदिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए संपन्न किए जा रहे हैं। हर दिन सुबह की मंगल आरती से लेकर देर शाम तक होने वाले हवन तक, श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ भाग ले रहे हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोगों के बीच आपसी भाईचारा बढ़ाने का एक माध्यम बन गया है।

गायत्री महायज्ञ का महत्व

गायत्री महायज्ञ को शास्त्रों में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। यहाँ आयोजित होने वाली प्रज्ञा महापुराण कथा के माध्यम से जीवन के ऐसे पहलुओं पर चर्चा की जाती है जो हमें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं। कथावाचक सरल और रोचक भाषा में कठिन आध्यात्मिक गुत्थियों को सुलझा रहे हैं, जिसे सुनकर हर उम्र के लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। इन प्रवचनों का सीधा प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है, जो अपनी संस्कृति को समझने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं।

अनुष्ठान और दिनचर्या

  • सुबह 5 बजे से वेदोच्चारण और मंत्रजाप के साथ कार्यक्रम की शुरुआत।
  • दोपहर में प्रज्ञा महापुराण की विस्तारपूर्वक कथा।
  • शाम को सामूहिक आरती और भक्ति संगीत की प्रस्तुति।
  • हर कुंड पर अलग-अलग यजमानों द्वारा आहुतियां देना।

मेला और मनोरंजन

यज्ञ स्थल के समीप लगा मेला इस आयोजन में एक नई ऊर्जा जोड़ रहा है। बच्चों और युवाओं के लिए यह स्थान उत्सव का केंद्र बना हुआ है। नौका झूला, जंपिंग झूला और खेल-खिलौने की दुकानों ने मेले को एक जीवंत रूप दे दिया है। शाम ढलते ही यहाँ स्थानीय परिवारों की भीड़ उमड़ने लगती है, जिससे अर्थव्यवस्था और सामाजिक जुड़ाव दोनों को बढ़ावा मिल रहा है। यह मेला ग्रामीण भारत की उस जीवंत तस्वीर को पेश करता है, जहां आस्था और मनोरंजन साथ-साथ चलते हैं।

समिति का समर्पण

इतने बड़े आयोजन को सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाने के पीछे स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों की मेहनत है। आयोजन समिति के सदस्य दिन-रात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में जुटे हैं। इस कार्य में मुख्य रूप से आचार्य उदय कुमार शास्त्री, नकुल पंडित, दीपक भगत, भगीरथ मंडल, विवेक भगत, मोजां मंडल और नयन शर्मा की भूमिका सराहनीय है। उनकी संगठनात्मक क्षमता का ही परिणाम है कि आस-पास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के यहाँ पहुंच रहे हैं।

सामुदायिक एकता की मिसाल

घनुआं गांव में चल रहा यह महायज्ञ एक सकारात्मक संदेश देता है। जब कोई आयोजन पूरी तरह से जन-भागीदारी और स्वैच्छिक सहयोग से चलता है, तो उसका प्रभाव दूरगामी होता है। यह महायज्ञ क्षेत्र के लोगों को एक सूत्र में बांधने का काम कर रहा है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन ही ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक ढांचे को सुदृढ़ रखने का मुख्य आधार बनेंगे। यदि आप भी इस भक्तिमय वातावरण का अनुभव करना चाहते हैं, तो घनुआं गांव का यह यज्ञ स्थल आने वाले दिनों में आपके लिए एक आदर्श स्थान हो सकता है।

विभाग विवरण
मुख्य कार्यक्रम नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ
स्थान घनुआं गांव, फुल्लीडुमर, बांका
मुख्य आकर्षण प्रज्ञा महापुराण कथा व मेला
प्रेरणा स्रोत शांतिकुंज, हरिद्वार के संत

आस्था की शक्ति ही वह धागा है जो समाज को हर संकट से उबार कर उसे एक सुखद भविष्य की ओर ले जाती है। घनुआं गांव में हो रहा यह अनुष्ठान इसी भावना का एक सुंदर उदाहरण है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

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