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श्रीरामपुर रिंग बांध टूटा, अकबरनगर के कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

भागलपुर के अकबरनगर में श्रीरामपुर रिंग बांध टूटने के बाद बाढ़ के पानी में डूबे घर और सुरक्षित स्थानों पर पलायन करते हुए ग्रामीण लोग

7 हजार से अधिक की आबादी प्रभावित, घरों में घुसा पानी; सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन

भागलपुर,अंग भारत। अकबरनगर और आसपास के इलाकों में गंगा नदी के बढ़े जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। सोमवार को अचानक पानी के भारी दबाव के कारण श्रीरामपुर रिंग बांध टूट गया। बांध टूटते ही तेज रफ्तार से बाढ़ का पानी श्रीरामपुर गांव और आसपास के कई इलाकों में फैल गया। देखते ही देखते पूरा श्रीरामपुर गांव पानी से घिर गया। इस घटना से करीब सात हजार से अधिक की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है।

बांध टूटते ही मची अफरा-तफरी

रिंग बांध में बड़ी दरार पड़ने और उसके बाद बांध के टूट जाने से ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने देखा कि तेज गति से पानी गांव की ओर बढ़ रहा है और कुछ ही समय में कई घरों में पानी प्रवेश करने लगा। इसके बाद ग्रामीण अपने परिवार के सदस्यों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकलने लगे।कई परिवारों ने घर की छतों पर शरण ली है, जबकि बड़ी संख्या में लोग जरूरी सामान लेकर ऊंचे स्थानों, मुख्य सड़कों और दूसरे सुरक्षित इलाकों की ओर चले गए हैं। अचानक आई इस बाढ़ ने लोगों के सामने रहने और खाने-पीने की समस्या खड़ी कर दी है।

कई दिनों से बढ़ रहा था पानी का दबाव

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कई दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। इसके कारण श्रीरामपुर रिंग बांध पर पानी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। रविवार की सुबह से ही ग्रामीणों को बांध पर खतरे का अंदेशा होने लगा था।ग्रामीणों ने अपने स्तर से मिट्टी, बोरे और दूसरे उपलब्ध साधनों के जरिए बांध को बचाने की कोशिश की। लोगों का कहना है कि पानी के बढ़ते दबाव के कारण बांध को बचाने के लिए ग्रामीणों की कोशिश नाकाफी साबित हुई। दोपहर तक बांध में कई जगह बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं और तेज बहाव के बीच देखते ही देखते बांध का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया।

पानी तेजी से गांवों में फैलने लगा

बांध टूटने के बाद पानी का बहाव इतना तेज था कि ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। श्रीरामपुर के अलावा आसपास के कई गांवों और निचले इलाकों में भी पानी तेजी से फैलने लगा। खेतों और रास्तों के बाद पानी घरों तक पहुंच गया।बाढ़ का पानी बढ़ने के कारण लोगों को अपने जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों ने घर का सामान ऊंची जगहों पर रखने की कोशिश की, लेकिन पानी तेजी से बढ़ने के कारण काफी सामान घरों में ही फंसा रह गया।

ग्रामीणों ने लगाया प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

रिंग बांध टूटने के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और जल संसाधन विभाग के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बांध पर बढ़ते दबाव की जानकारी समय रहते संबंधित अधिकारियों को दी गई थी। इसके बावजूद बांध को बचाने के लिए समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बांध की मरम्मत और सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाते तो स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता था। अब बांध टूटने का खामियाजा हजारों लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

राहत और बचाव का इंतजार

फिलहाल प्रभावित इलाकों में लोग अपने स्तर पर सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं। जिन घरों में पानी प्रवेश कर गया है, वहां रहने वाले परिवारों के सामने भोजन, पीने के पानी और रहने की समस्या बढ़ गई है। छतों पर फंसे परिवार भी मदद की उम्मीद लगाए हुए हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने, सुरक्षित स्थानों पर लोगों को पहुंचाने और प्रभावित परिवारों के लिए भोजन व पीने के पानी की व्यवस्था करने की मांग की है। साथ ही रिंग बांध की स्थिति का जायजा लेकर आगे पानी के फैलाव को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग भी की गई है।बांध टूटने के बाद अकबरनगर और आसपास के इलाके में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई है। ऐसे में प्रभावित लोगों को अब प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू होने का इंतजार है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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