भागलपुर,अंग भारत। जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। दियारा इलाके में पानी तेजी से फैलने के बाद हजारों परिवारों के सामने जीवन बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक परिवार के साथ रोजमर्रा की जिंदगी चल रही थी, आज वही घर पानी में डूब चुके हैं। लोग अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। घर, अनाज और रोजमर्रा के सामान पीछे छूट गए हैं और अब राहत की आस ही उनका सहारा बनी हुई है।
गांवों में पसरा पानी और सन्नाटा
नाथनगर प्रखंड के रतीपुर, बैरिया शंकरपुर, अजमेरीपुर, रसीदपुर और श्रीरामपुर समेत कई गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह प्रभावित हैं। गांव की गलियां और रास्ते पानी में डूब गए हैं। जिन जगहों पर बच्चों की आवाजें और लोगों की चहल-पहल रहती थी, वहां अब चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है।पानी बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में परिवार अपना घर छोड़कर ऊंचे स्थानों की ओर चले गए हैं। कई विस्थापित परिवारों ने रविंद्र भवन और टिल्हा कोठी जैसे ऊंचे सरकारी भवनों में शरण ली है। लोगों को उम्मीद थी कि सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद कुछ राहत मिलेगी, लेकिन यहां भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
सिर छुपाने की जगह मिली, पर पेट की चिंता
बाढ़ से विस्थापित परिवारों के सामने रहने के साथ-साथ भोजन, पीने के पानी और शौचालय की समस्या भी बनी हुई है। कई परिवारों को सरकारी भवनों के भीतर जगह नहीं मिल पाई। ऐसे परिवार सड़क किनारे या खुले मैदानों में तिरपाल लगाकर किसी तरह रात काट रहे हैं।अस्थायी तंबुओं में छोटे बच्चों के साथ परिवार दिन-रात गुजार रहे हैं। बारिश और पानी के बीच इन परिवारों के लिए बच्चों को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है। घरों में रखा अनाज और जरूरी सामान पानी में बह जाने के कारण कई परिवारों के पास खाने के लिए भी पर्याप्त सामग्री नहीं बची है।
इंसानों के साथ मवेशियों की भी चिंता
बाढ़ की मार सिर्फ लोगों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के लिए अपने मवेशियों को बचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। कई परिवार किसी तरह अपनी जान जोखिम में डालकर गाय, भैंस और दूसरे पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर लेकर आए हैं। लेकिन अब इनके लिए चारे का संकट पैदा हो गया है।चारागाह और खेत पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। ऐसे में पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते पशु चारे की व्यवस्था नहीं हुई तो उनके सामने एक और बड़ी परेशानी खड़ी हो जाएगी। लोग एक तरफ अपने बच्चों और परिवार को बचाने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर बेजुबान पशुओं की चिंता भी उन्हें परेशान कर रही है।
‘गंगा मइया ने हमारा सब कुछ छीन लिया’
बाढ़ पीड़ितों के चेहरे पर परेशानी साफ दिखाई दे रही है। एक पीड़ित ने रोते हुए कहा, “गंगा मइया ने हमारा सब कुछ छीन लिया। घर डूब गया, अनाज बह गया। अब बच्चों को क्या खिलाएं और खुद कहां जाएं, कुछ समझ नहीं आ रहा।”यह दर्द अकेले एक परिवार का नहीं है। प्रभावित इलाकों में ऐसे कई परिवार हैं जो घर और जमा पूंजी गंवाने के बाद अब पूरी तरह राहत व्यवस्था पर निर्भर हो गए हैं। लोगों का कहना है कि पानी लगातार बढ़ रहा है और उन्हें यह भी पता नहीं कि वे कब तक अपने घर लौट पाएंगे।
राहत नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतनी बड़ी आपदा के बावजूद उन्हें अब तक पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिल पाई है। प्रभावित परिवारों को सूखा राशन, पीने का साफ पानी और दूसरी जरूरी सामग्री की जरूरत है। लोगों का कहना है कि राहत सामग्री और कम्युनिटी किचन जैसी सुविधाएं अभी भी सभी प्रभावित परिवारों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।बाढ़ के बढ़ते पानी के साथ प्रशासन के सामने भी चुनौती लगातार बढ़ रही है। दियारा इलाकों में कई जगह आवागमन प्रभावित है। ऐसे में राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं पहुंचाना आसान नहीं है।
सूखा राशन और चारे की सबसे ज्यादा जरूरत
फिलहाल बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए सूखा राशन, पीने का साफ पानी, दवाइयां, शौचालय और सुरक्षित रहने की जगह सबसे जरूरी है। इसके साथ ही मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था भी तत्काल किए जाने की जरूरत है।गंगा का जलस्तर अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो और भी इलाके प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ उनके लिए भोजन, पानी और चिकित्सा की व्यवस्था करने की है। बाढ़ पीड़ितों की उम्मीद अब सरकारी मदद पर टिकी है। लोगों को इंतजार है कि राहत की घोषणाएं जल्द जमीन पर दिखाई दें और मुश्किल की इस घड़ी में उन्हें समय पर सहारा मिल सके।







