अमरपुर/बांका/अंग भारत। बांका जिले के अमरपुर नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध बाबा पनियानाथ महादेव टेम्पल में एक बार फिर चोरी की घटना सामने आई है। अज्ञात चोर मंदिर के मुख्य द्वार पर लगा करीब 25 किलो वजन का कांसे का घंटा चुराकर फरार हो गए। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
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सुबह पुजारी को मिली चोरी की जानकारी
मंदिर के पुजारी गोपाल साह ने बताया कि वे रोज की तरह शनिवार तड़के करीब चार बजे मंदिर पहुंचे। सफाई के दौरान उन्होंने देखा कि मुख्य द्वार पर लगा भारी कांसे का घंटा गायब है। इसके बाद उन्होंने तुरंत मंदिर समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार उर्फ डबलू भगत को सूचना दी।सूचना मिलते ही मंदिर समिति के सदस्य और स्थानीय श्रद्धालु मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।
पुलिस जांच में जुटी, CCTV भी बेअसर
डायल 112 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है, लेकिन घटना के समय बिजली आपूर्ति बाधित थी। आशंका जताई जा रही है कि रात में दो से तीन घंटे तक बिजली नहीं रहने का फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया।
लोगों में आक्रोश और डर का माहौल
घटना के बाद स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। समाजसेवियों और ग्रामीणों ने इस वारदात की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अब चोर भगवान के मंदिर को भी नहीं छोड़ रहे हैं। लोगों ने आशंका जताई कि नशे की लत में फंसे कुछ युवक इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
एक महीने में कई मंदिरों में चोरी
गौरतलब है कि पिछले एक महीने के भीतर क्षेत्र में मंदिरों में चोरी की यह तीसरी घटना है। इससे पहले सलेमपुर पंचायत के विश्वम्भरचक गांव स्थित बाबा सोमनाथ महादेव टेम्पल से कांसे का कलश और घंटा चोरी हुआ था। वहीं फतेहपुर के पास दक्षिणेश्वर काली टेम्पल से भी मुख्य द्वार पर लगा बड़ा कांसे का घंटा चोरी कर लिया गया था।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं ने मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
पुलिस से गश्ती बढ़ाने की मांग
मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस प्रशासन से रात में गश्ती बढ़ाने और मंदिरों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।इस घटना ने न सिर्फ श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत किया है, बल्कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।










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