कटिहार,अंग भारत। प्रशांत किशोर ने शनिवार को कटिहार दौरे के दौरान केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। जन सुराज अभियान के तहत आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के विकास के लिए मिलने वाले धन का उपयोग चुनाव जीतने में किया गया है, जिससे राज्य की प्रगति प्रभावित हुई है।
Read more……..निशांत कुमार ने तय की नई राजनीतिक रणनीति
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर तीखी टिप्पणी
कटिहार के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार ने जनता से जो वादे किए थे, वे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने खासतौर पर रोजगार के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने एक वर्ष में एक करोड़ नौकरियां देने का दावा किया था, लेकिन सरकार बनने के छह महीने बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग पहले से नौकरी में हैं, उन्हें भी समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री चेहरे पर उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को उन्हें मुख्यमंत्री बनाना था, तो यह घोषणा चुनाव से पहले ही कर देनी चाहिए थी। इससे जनता को यह निर्णय लेने का अवसर मिलता कि वे किसे राज्य का नेतृत्व सौंपना चाहते हैं।उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि जनता को पूरी जानकारी के साथ वोट देने का अधिकार होना चाहिए।
डिग्री विवाद पर भी घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे ज्ञान और शिक्षा की भूमि में ऐसे व्यक्ति का मुख्यमंत्री बनना चिंताजनक है, जिसके शैक्षणिक रिकॉर्ड पर ही सवाल उठ रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग शपथ पत्रों में सम्राट चौधरी ने अपनी शैक्षणिक योग्यता को अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत किया है। पहले उन्होंने खुद को सातवीं पास बताया, फिर मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई का दावा किया और बाद में अमेरिका से डी.लिट की बात कही।
आम जनता बनाम नेताओं पर दोहरा मापदंड
प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि कोई आम व्यक्ति नौकरी में गलत प्रमाणपत्र जमा करता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन नेताओं के मामले में ऐसा नहीं होता। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।
जन सुराज अभियान का बढ़ता विस्तार
उन्होंने कहा कि जन सुराज अभियान का उद्देश्य बिहार में पारदर्शी और जवाबदेह राजनीति स्थापित करना है। इसके लिए वे लगातार विभिन्न जिलों का दौरा कर जनता के बीच संवाद कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं|राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर के इस तरह के बयान आगामी राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं और राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकते हैं।









