गुवाहाटी, अंग भारत। असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासी फिजाओं में हलचल मचा दी है। मतगणना के पहले राउंड में ही भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जबकि विपक्षी खेमे में विशेष रूप से गौरव गोगोई की शुरुआती बढ़त में गिरावट ने राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है। वर्तमान स्थिति यह है कि भाजपा अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल चुकी है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि असम में केसरिया खेमा फिर से अपनी सत्ता की जड़ें मजबूत कर रहा है।
शुरुआती रुझानों का गणित
चुनाव आयोग से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8 बजे शुरू हुई गिनती के पहले दौर में भाजपा की एकतरफा लहर दिखाई दे रही है। असम की कुल 126 सीटों में से शुरुआती रुझानों ने जो तस्वीरें पेश की हैं, वे भाजपा के लिए बेहद सकारात्मक हैं:
- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): 32 सीटों पर निर्णायक बढ़त।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: 9 सीटों पर सिमटी हुई।
- बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ): 5 सीटों के साथ दौड़ में।
- असम गण परिषद (अगप) और असम जातीय परिषद (एजेपी): प्रत्येक 3 सीटों पर आगे।
- ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ): केवल 1 सीट पर बढ़त।
गौरव गोगोई की चुनौती
असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के लिए यह चुनाव साख का सवाल बना हुआ है। जोरहाट जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्हें भाजपा के कद्दावर नेता हितेंद्र नाथ गोस्वामी से कड़ी चुनौती मिल रही है। आंकड़ों पर गौर करें, तो पहले राउंड की गिनती के बाद हितेंद्र नाथ गोस्वामी को 4993 वोट मिले, जबकि गौरव गोगोई 3937 वोटों पर अटक गए। यह 1056 मतों का फासला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए चिंता का विषय है। हालांकि, राजनीति में पहले राउंड की बढ़त अंतिम फैसला नहीं होती, लेकिन यह मनोवैज्ञानिक दबाव जरूर बनाती है।
भाजपा की बढ़त क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह बढ़त जमीनी स्तर पर किए गए संगठन विस्तार का परिणाम है। असम में विकास के एजेंडे और सरकार की लोकलुभावन योजनाओं ने मतदाताओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में शांति और स्थिरता का जो माहौल बना है, उसने भाजपा के पक्ष में एक मजबूत नैरेटिव तैयार किया है। इसके विपरीत, विपक्ष अभी भी अपनी रणनीति को जनता के बीच पूरी तरह प्रभावी तरीके से पेश करने में जूझता दिख रहा है।
विपक्ष की आगामी राह
कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के लिए आने वाले राउंड बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। यदि विपक्षी दल अपने गढ़ों में वापसी नहीं कर पाते हैं, तो असम की विधानसभा में भाजपा का बहुमत और अधिक स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल, भाजपा के कार्यकर्ता जीत के जश्न की तैयारियों में जुटे हैं, जबकि कांग्रेस के कैंप ऑफिसों में सन्नाटा पसरा है और उम्मीदें आखिरी राउंड के आंकड़ों पर टिकी हैं।
मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा
राज्य के सभी काउंटिंग सेंटरों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती और प्रशासन की कड़ी निगरानी के बीच हर ईवीएम की सील और राउंड-दर-राउंड डेटा को चेक किया जा रहा है। चुनाव आयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर राउंड के अंत में लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणाएं की जा रही हैं, जिससे अफवाहों पर लगाम लग सके।
मतगणना का यह रुझान केवल एक तस्वीर है। राज्य की 126 सीटों का अंतिम परिणाम ही यह तय करेगा कि असम की अगली सरकार किस एजेंडे पर चलेगी। फिलहाल, भाजपा ने अपनी बढ़त के साथ मनोवैज्ञानिक लड़ाई में बड़ी बाजी मार ली है।
अंत में, जैसे-जैसे दिन चढ़ेगा, राज्य की कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। क्या कांग्रेस कोई चमत्कारिक वापसी कर पाएगी या भाजपा अपनी बयार को लहर में बदलने में सफल रहेगी? इसका जवाब आने वाले कुछ घंटों के परिणामों में छिपा है। सत्ता का यह गलियारा फिलहाल पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में झुकता हुआ प्रतीत हो रहा है, लेकिन राजनीति की बिसात कभी भी पलटी मार सकती है।







