गुवाहाटी, अंग भारत। हिमंत बिस्व सरमा ने एक बार फिर असम के मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाल ली है। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी कॉलेज खेल मैदान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह केवल एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं था, बल्कि राज्य की राजनीति में स्थिरता और निरंतरता की एक बड़ी घोषणा थी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे दिग्गजों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में पूर्वोत्तर का विकास सबसे ऊपर है।
जनता का स्पष्ट जनादेश
असम विधानसभा चुनावों के परिणाम इस बात का प्रमाण थे कि राज्य की जनता विकास के एजेंडे को लेकर कितनी गंभीर है। 126 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए (NDA) ने 102 सीटों पर कब्जा जमाया। भाजपा की अकेले 82 सीटों पर जीत ने साबित किया कि पिछले कार्यकाल में किए गए जमीनी काम जनता तक पहुंचे हैं। भारी बहुमत ने सरकार को न केवल राजनीतिक सुरक्षा प्रदान की है, बल्कि बड़े नीतिगत फैसले लेने का साहस भी दिया है।
मंत्रिमंडल और सहयोगी समीकरण
नई सरकार में न केवल भाजपा के पुराने और अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया गया है, बल्कि गठबंधन की एकजुटता को भी प्राथमिकता दी गई है। मंत्रिमंडल के गठन में संतुलन का खास ध्यान रखा गया है:
- अजंता नेओग और रामेश्वर तेल: भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के रूप में नई भूमिकाओं में शामिल किए गए।
- अतुल बोरा: असम गण परिषद (AGP) का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी पकड़ बनाए रखी।
- चरण बोडो: बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) की भागीदारी से क्षेत्रीय संतुलन साधा गया।
विकास की नई कार्ययोजना
मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, हिमंत बिस्व सरमा का रुख काफी स्पष्ट है। उन्होंने अपने पहले संबोधन में संकेत दिया कि आने वाले पांच साल ‘असम को नई ऊंचाई’ पर ले जाने वाले होंगे। सरकार का ध्यान अब मुख्य रूप से इन क्षेत्रों पर केंद्रित है:
- बुनियादी ढांचा: सड़कों, पुलों और कनेक्टिविटी को और अधिक बेहतर बनाना।
- रोजगार सृजन: युवाओं के लिए निजी और सरकारी क्षेत्र में नए अवसर पैदा करना।
- सामाजिक सुरक्षा: कमजोर तबकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ाना।
- बाढ़ नियंत्रण: असम की सबसे पुरानी और बड़ी समस्या के समाधान हेतु दीर्घकालिक योजनाएं।
राजनीतिक स्थिरता और दूरदर्शिता
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिमंत बिस्व सरमा की कार्यशैली में ‘गति’ एक महत्वपूर्ण कारक है। उनके पिछले कार्यकाल में फाइलों का निपटारा हो या फिर विवादित मुद्दों को हल करना, सरमा ने एक प्रशासक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। दोबारा सत्ता में वापसी का मतलब है कि राज्य अब नीतिगत निरंतरता की ओर बढ़ेगा। केंद्र की ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी और असम की स्थानीय आकांक्षाओं के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण होता दिख रहा है।
उम्मीदों का नया दौर
असम की जनता अब नई सरकार से उन अधूरे कार्यों को पूरा करने की उम्मीद कर रही है जो पिछले पांच वर्षों में शुरू हुए थे। विकास की गति को बनाए रखना और राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिकता का तालमेल बिठाना, आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती और अवसर दोनों होगा। एक सशक्त सरकार के साथ, असम के लोगों के लिए यह उम्मीद का एक नया सवेरा है, जहाँ स्थिरता और विकास एक साथ चलते हुए नजर आ रहे हैं।








