गुवाहाटी, अंग भारत। असम विधानसभा के मौजूदा सत्र के चौथे दिन मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए राज्य की बदली हुई राजनीतिक तस्वीर और सरकार के भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने न केवल ऐतिहासिक जनादेश हासिल किया है, बल्कि राज्य में शांति और विकास का एक नया अध्याय लिखा है। आज असम उस दौर से बाहर निकल चुका है जहाँ हिंसा और बंद रोजमर्रा की खबरें हुआ करती थीं, और अब राज्य का लक्ष्य आर्थिक आत्मनिर्भरता और युवा रोजगार है।
ऐतिहासिक जनादेश और समर्थन
मुख्यमंत्री ने सदन में आंकड़ों के माध्यम से इस जीत की व्यापकता को समझाया। एनडीए को मिला जनादेश कोई सामान्य जीत नहीं, बल्कि जनता का अटूट भरोसा है। इस गठबंधन को कुल मिलाकर लगभग एक करोड़ मतदाताओं का सीधा समर्थन मिला है।
- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): 82 लाख वोट
- असम गण परिषद (एजीपी): 14 लाख वोट
- बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ): 8 लाख वोट
इन आंकड़ों के साथ एनडीए ने 102 सीटों पर कब्जा किया, जो असम के लोकतांत्रिक इतिहास में एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में दर्ज है। सरमा के अनुसार, यह जनादेश सरकार की नीतियों और जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों का परिणाम है।
शांति बहाली का युग
एक समय था जब असम बम विस्फोटों, आंदोलन की हिंसा और अनिश्चितता के माहौल से जूझ रहा था। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि आज की स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। शांति और व्यवस्था की बहाली इस सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
सरकार ने कठोर सुरक्षा नीतियों के बजाय संवाद का रास्ता चुना है। राज्य में हिंसक गतिविधियों में लगातार कमी आई है और उग्रवादी गुटों के साथ शांति समझौते करना सरकार की प्राथमिकता रही है। यही कारण है कि आज असम का वातावरण भयमुक्त है, जो निवेश और व्यापार के लिए भी सकारात्मक संकेत है।
मुख्यधारा में लौटे युवा
असम की शांति का सबसे बड़ा प्रमाण मुख्यधारा में वापस लौटे युवाओं की संख्या है। मुख्यमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि विभिन्न शांति समझौतों के जरिए लगभग 6,000 युवाओं ने हथियारों का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन को अपनाया है।
उल्फा जैसे उग्रवादी संगठनों के प्रभाव में भारी कमी आई है, क्योंकि अब युवा हिंसा नहीं, बल्कि विकास और रोजगार में अपना भविष्य देख रहे हैं।
सरकार केवल युवाओं को मुख्यधारा में वापस नहीं ला रही है, बल्कि उन्हें कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर अवसर भी प्रदान कर रही है ताकि वे भटकाव का शिकार न हों।
रोजगार और सरकारी नौकरियां
मुख्यमंत्री का मुख्य फोकस राज्य के युवाओं को सरकारी नौकरियों से जोड़ने पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा सरकार के चुनावी घोषणापत्र का मुख्य स्तंभ था। इसे पूरा करने के लिए एक पारदर्शी और तीव्र भर्ती रोडमैप तैयार किया गया है। आने वाले महीनों में भर्ती की गति को और तेज किया जाएगा ताकि योग्य युवाओं को योग्यता के आधार पर पद मिल सके।
महिला सशक्तिकरण की पहल
विकास की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना अब केवल कागजी वादा नहीं रहा। सरमा ने कहा कि असम की महिलाएं घर की चौखट से बाहर निकलकर अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी बन रही हैं। सरकार विशेष वित्तीय सहायता और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता से न केवल परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि यह पूरे समाज के उत्थान का कारण बनेगा।
महंगाई पर सीधा रुख
पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों और महंगाई जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी मुख्यमंत्री ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में स्वीकार किया कि वैश्विक परिस्थितियों का असर कीमतों पर पड़ता है, लेकिन राज्य सरकार की नीतियां ऐसी हैं कि आम आदमी पर इसका बोझ कम से कम हो। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की कठिनाइयों को समझती है और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए उन्हें राहत देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।








