गुवाहाटी,अंग भारत। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य मंगोलिया में आयोजित होने वाले एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस प्रतिनिधिमंडल के साथ भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष भी ले जाए जाएंगे, जिन्हें भारत के सांची स्थित विहार चैत्य में संरक्षित रखा गया है।
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सांची से मंगोलिया तक पहुंचेगा पवित्र अवशेषों का संदेश
यह आध्यात्मिक यात्रा भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक बौद्ध संबंधों को और गहराई देने के उद्देश्य से की जा रही है। ये पवित्र अवशेष यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची स्तूप से जुड़े हुए हैं और बौद्ध अनुयायियों के लिए अत्यंत श्रद्धा का केंद्र माने जाते हैं। इन्हें 9 जून तक मंगोलिया में एक विशेष प्रदर्शनी के दौरान रखा जाएगा, जहां श्रद्धालु इनका दर्शन कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री की पहल पर मजबूत हो रहे सांस्कृतिक रिश्ते
यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष पहल के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करना है। मंगोलिया को बौद्ध जगत में भारत का आध्यात्मिक पड़ोसी माना जाता है, और यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को फिर से उजागर करेगा।
श्रद्धालुओं और विद्वानों की बड़ी भागीदारी की उम्मीद
इस कार्यक्रम में मंगोलिया के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में भिक्षु, श्रद्धालु और बौद्ध विद्वानों के शामिल होने की संभावना है। वे इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर श्रद्धा अर्पित करेंगे। इसे दोनों देशों के बीच साझा बौद्ध विरासत और मित्रता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के 3 जून को भारत लौटने की संभावना जताई गई है। यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ कूटनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है










