बिहार,अंग भारत| भागलपुर के घोघा थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां जानीडीह गांव के निवासी बुनेल यादव को उनकी ही बेटियों ने जीवित रहते हुए ‘कागजों में मृत’ घोषित कर दिया और उनकी पुश्तैनी जमीन हड़प ली। बुनेल यादव ने कहलगांव अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी बेटियों ने एक फर्जी बंटवारा दस्तावेज तैयार किया, जिस पर न तो उनके हस्ताक्षर हैं और न ही अंगूठे का निशान। इस धोखाधड़ी का सहारा लेकर उन्होंने पूरी जमीन बेच दी और अब इस बुजुर्ग पिता के पास न तो सिर छुपाने को छत बची है और न ही पेट भरने का कोई सहारा।
फर्जीवाड़े का सच
मामला तब गंभीर हो गया जब बुनेल यादव को पता चला कि उनकी गैर-मौजूदगी और सहमति के बिना एक कथित बंटवारा पत्र तैयार कर लिया गया है। कानून की नजर में कोई भी बंटवारा तब तक मान्य नहीं होता जब तक कि जमीन का असली मालिक उस पर अपनी सहमति न दे। इस मामले में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर एक ऐसा दस्तावेज बनाया गया जो पूरी तरह से अवैध है।
- दस्तावेज पर मालिक के हस्ताक्षर का अभाव।
- अंगूठे के निशान की जगह फर्जीवाड़े का इस्तेमाल।
- बिना कानूनी प्रक्रिया के जमीन का हस्तांतरण।
बेटियों का बड़ा खेल
पीड़ित वृद्ध का कहना है कि उनकी दोनों विवाहित बेटियों ने सोची-समझी साजिश के तहत इस पूरी घटना को अंजाम दिया। जैसे ही उन्हें मौका मिला, उन्होंने फर्जी बंटवारे के आधार पर 14 डिसमिल जमीन बेच दी। जब बुनेल यादव ने इस धोखे का विरोध किया, तो उन्हें उनके ही घर से बाहर निकाल दिया गया। यह केवल संपत्ति का विवाद नहीं है, बल्कि पारिवारिक मूल्यों और कानून के साथ खिलवाड़ का एक क्रूर उदाहरण है।
जीविका का संकट
इस उम्र में, जब व्यक्ति को अपने परिवार के सहारे और शांति की जरूरत होती है, बुनेल यादव सड़क पर आ गए हैं। जमीन बिक जाने के कारण अब उनके पास न केवल संपत्ति खोने का गम है, बल्कि रहने की जगह और रोज़ी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। एक पिता के लिए यह स्थिति किसी भी शारीरिक प्रताड़ना से कम नहीं है।
प्रशासनिक जांच जरूरी
बुनेल यादव ने कहलगांव अनुमंडल पदाधिकारी के पास गुहार लगाकर न्याय की मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को सजा मिले और उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन वापस मिल सके। स्थानीय प्रशासन ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया है।
कानूनी सुरक्षा के उपाय
इस तरह के मामलों से बचने के लिए वरिष्ठ नागरिकों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि उनके साथ धोखाधड़ी न हो सके:
- जमीन के दस्तावेज सुरक्षित रखें: अपने सभी मूल कागजात बैंक लॉकर या किसी विश्वसनीय स्थान पर रखें।
- पॉवर ऑफ अटॉर्नी से बचें: किसी को भी अपनी संपत्ति का अधिकार देने वाली पॉवर ऑफ अटॉर्नी देते समय बेहद सतर्क रहें।
- समय-समय पर जांच करें: अपने क्षेत्र के अंचल कार्यालय या भूमि सुधार विभाग में जाकर अपनी जमीन की स्थिति (दाखिल-खारिज की जानकारी) चेक करते रहें।
- वसीयत का सहारा: यदि आप अपनी संपत्ति किसी को देना चाहते हैं, तो उसका पंजीकरण करवाएं ताकि बाद में कोई विवाद न हो।
बुनेल यादव का यह मामला समाज के लिए एक आईना है। बुजुर्गों की असुरक्षा और पारिवारिक लालच का यह कड़वा सच हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या कानून और संवेदनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं? अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस बुजुर्ग को उनका हक और सम्मान वापस मिल पाएगा या वे न्याय के इंतजार में दर-दर भटकते रहेंगे।








