असम,अंग भारत| असम की राजनीति में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और 5 जून को कैबिनेट विस्तार होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। गुवाहाटी में प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
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मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तैयारियां लगभग पूरी
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले संभावित विधायकों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है। विस्तार के लिए आवश्यक राजनीतिक और प्रशासनिक अनुमोदन भी प्राप्त हो चुका है। ऐसे में अब केवल औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।राजनीतिक हलकों में इस विस्तार को आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली बैठक में बनी अंतिम सहमति
पार्टी सूत्रों का दावा है कि शनिवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हुई मुलाकात के दौरान संभावित मंत्रियों के नामों पर अंतिम चर्चा और सहमति बनी।मुख्यमंत्री ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से संकेत दिया है कि 5 जून को मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इसके बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।
7 से 12 विधायकों को मिल सकती है जिम्मेदारी
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक इस विस्तार में 7 से 12 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। इसके साथ ही मौजूदा मंत्रियों के कुछ विभागों में फेरबदल और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की भी संभावना जताई जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि नए चेहरों को शामिल कर सरकार क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को और मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।
लंबे समय से चल रही थीं चर्चाएं
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा शरमा और चार कैबिनेट मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद से ही मंत्रिमंडल में विस्तार की अटकलें लगाई जा रही थीं। पार्टी और सरकार के भीतर विभिन्न क्षेत्रों तथा समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।इसी वजह से नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने और प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं।
अंतिम सूची पर टिकी राजनीतिक नजरें
हालांकि अब तक संभावित मंत्रियों के नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राज्य की राजनीति में इस विस्तार को लेकर उत्सुकता चरम पर है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं, विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अंतिम सूची पर टिकी हुई हैं।माना जा रहा है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं होगा, बल्कि इससे सरकार की भविष्य की राजनीतिक रणनीति और चुनावी तैयारियों की भी झलक देखने को मिल सकती है।











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