नई दिल्ली,अंग भारत। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी नेतृत्व और संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण पार्टी जनता से कट गई और संगठन में समर्पित कार्यकर्ताओं की जगह भ्रष्ट तथा आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को बढ़ावा दिया गया।
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इस्तीफे के बाद टीएमसी पर खुलकर बोले राय
सोमवार को अपने इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर राय ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लंबे शासनकाल की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने हार के कारणों की गंभीर समीक्षा करने की जरूरत नहीं समझी।
सत्ता ने नेताओं को जनता से किया दूर
राय का आरोप है कि सत्ता में लंबे समय तक बने रहने के कारण पार्टी नेतृत्व आम जनता की समस्याओं से दूर हो गया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों तक लोगों की पहुंच मुश्किल होती चली गई, जिससे जनता और सरकार के बीच दूरी बढ़ती गई।
पुराने कार्यकर्ताओं की हुई उपेक्षा
पूर्व राज्यसभा सदस्य ने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक संघर्ष कर संगठन को मजबूत किया था, उन्हें धीरे-धीरे हाशिये पर डाल दिया गया। उनकी जगह ऐसे लोगों को महत्व दिया गया जिनकी छवि विवादित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिचौलियों, भ्रष्ट तत्वों और आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों का प्रभाव संगठन में लगातार बढ़ता गया।
पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप
पत्रकारों से बातचीत के दौरान राय ने पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और कई जनप्रतिनिधियों की संपत्तियों में असामान्य वृद्धि देखी गई। उनके अनुसार, इन मामलों को लेकर जनता के बीच व्यापक असंतोष था।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले का भी किया जिक्र
राय ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नागरिक, डॉक्टर और विभिन्न संगठनों के लोग न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे, लेकिन सरकार और सत्तारूढ़ दल जनता की भावनाओं को समझने में असफल रहे।
खरीद प्रक्रियाओं और संपत्तियों की जांच की मांग
सुखेंदु शेखर राय ने नई सरकार से पिछले पांच वर्षों के दौरान अस्पतालों में हुई खरीद प्रक्रियाओं की जांच कराने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न स्तरों के जनप्रतिनिधियों और नेताओं की संपत्तियों की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
लोकतंत्र में जनता ही अंतिम निर्णायक
राय ने कहा कि सत्ता के अहंकार में यह मान लिया गया था कि पार्टी को कोई चुनौती नहीं दे सकता। लेकिन लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है और जनता ने अपने मतदान के माध्यम से स्पष्ट संदेश दे दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए जनता के विश्वास को बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे और उनके आरोपों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बयान आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और टीएमसी के भीतर की स्थिति को लेकर बहस को और तेज कर सकते हैं।












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