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भागलपुर में दुर्लभ हरियल पक्षियों की रहस्यमयी मौत, पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

भागलपुर,अंग भारत। भागलपुर जिले के कहलगांव स्थित श्यामपुर पंचायत में दुर्लभ हरियल पक्षियों (Green Pigeon) की एक साथ हुई रहस्यमयी मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। खेतों और पेड़ों के नीचे मृत पाए गए इन पक्षियों की संख्या आधा दर्जन से अधिक है, जिसने न केवल ग्रामीणों को बल्कि वन्यजीव विशेषज्ञों को भी गहरा धक्का पहुँचाया है। यह कोई मामूली घटना नहीं है, बल्कि उस पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक चेतावनी है, जो पहले से ही शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के दबाव में है। अब प्रशासन और वन विभाग पर तत्काल पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक जांच का भारी दबाव है ताकि यह पता चल सके कि क्या इन पक्षियों की जान किसी कीटनाशक के प्रयोग से गई है या इसके पीछे कोई घातक वायरस है।

मौत का कारण क्या है?

घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के बीच कयासों का बाजार गर्म है। भाजपा नेता रणवीर सिंह ने भी इस त्रासदी को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन मौतों के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हो सकते हैं:

  • रासायनिक कीटनाशक: आसपास के खेतों में हाल ही में हुए छिड़काव से पक्षियों ने जहरीले दाने या फल खा लिए होंगे, जो उनके लिए जानलेवा साबित हुए।
  • तीव्र लू और गर्मी: भागलपुर के इस क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण पक्षियों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की समस्या तेजी से देखी जा रही है।
  • पर्यावरणीय असंतुलन: पेड़ों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण के कारण इन पक्षियों का प्राकृतिक आवास छिन रहा है, जिससे वे भोजन की तलाश में उन क्षेत्रों में जा रहे हैं जहाँ खतरा अधिक है।

हरियल का पारिस्थितिक महत्व

हरियल पक्षी, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘ट्रेरॉन फोनिकॉप्टेरा’ कहा जाता है, केवल अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक ‘इंजीनियर’ की तरह काम करता है। यह महाराष्ट्र का राजकीय पक्षी है और इसे अक्सर ‘हरा कबूतर’ भी कहा जाता है। इसका जीवन चक्र पीपल, बरगद और गूलर जैसे विशाल पेड़ों पर टिका होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हरियल पक्षी जंगलों के विस्तार में मुख्य भूमिका निभाते हैं। ये पक्षी फलों को खाकर उनके बीज को दूर-दूर तक गिराते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से वनीकरण (Afforestation) होता है। यदि ये पक्षी लुप्त हो गए, तो भविष्य में नए पेड़-पौधों के प्राकृतिक प्रसार पर सीधा असर पड़ेगा।

संरक्षण की तत्काल आवश्यकता

पर्यावरणविद दीपक कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि इन घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। पिछले कुछ महीनों में भागलपुर के विभिन्न हिस्सों से हरियल की मौत की सूचनाएं आ रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक पैटर्न है।

स्थानीय समुदाय की मांग है कि वन विभाग निम्नलिखित कदम उठाए:

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट: मृत पक्षियों के अंगों की गहन जांच ताकि ज़हर की पुष्टि हो सके।
  • जागरूकता अभियान: किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक करना।
  • वॉटर पॉइंट्स: गर्मी के दौरान पक्षियों के लिए पेड़ों के नीचे कृत्रिम पानी के पात्र (सीकों) की व्यवस्था।
  • वन क्षेत्र सुरक्षा: जिन इलाकों में इनका बसेरा है, वहां पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध।

भविष्य के लिए चुनौती

हरियल का समाज में दिखना इस बात का प्रमाण है कि अभी भी हमारे आसपास हरियाली बची हुई है। लेकिन उनकी मौत का यह सिलसिला इस बात का सबूत है कि हम अपनी जैव विविधता को सुरक्षित रखने में कहीं न कहीं चूक कर रहे हैं। भागलपुर प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि क्या वे इन दुर्लभ पक्षियों की मौत के कारणों को वैज्ञानिक आधार पर सिद्ध कर पाएंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? पर्यावरण को बचाने का अर्थ केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि उन जीवों को बचाना भी है जो उस पर्यावरण की रीढ़ हैं।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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