कहलगांव के श्यामपुर क्षेत्र में मिले कई मृत हरियल, जांच की उठी मांग
भागलपुर,अंग भारत। जिले के कहलगांव क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। श्यामपुर पंचायत इलाके में दुर्लभ हरियल प्रजाति के कई पक्षी मृत अवस्था में पाए गए हैं। विलुप्ति के खतरे से जूझ रही इस प्रजाति के पक्षियों की अचानक हुई मौत ने ग्रामीणों के साथ-साथ पर्यावरणविदों को भी हैरान कर दिया है।स्थानीय लोगों के अनुसार गांव के आसपास स्थित पेड़ों के नीचे करीब आधा दर्जन हरियल पक्षी मृत मिले। घटना की जानकारी फैलते ही क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया। लोगों ने आशंका जताई कि इन पक्षियों की मौत किसी गंभीर पर्यावरणीय कारण का परिणाम हो सकती है।पर्यावरणविद दीपक कुमार सिंह ने बताया कि पिछले कई महीनों से भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों से हरियल पक्षियों की असामयिक मौत की सूचनाएं मिल रही हैं। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस दुर्लभ प्रजाति के अस्तित्व के लिए खतरे का संकेत हो सकती हैं।
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गर्मी, रसायन या पर्यावरणीय बदलाव पर जताई जा रही आशंका
भाजपा नेता रणवीर सिंह ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि पक्षियों की मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। प्रारंभिक स्तर पर तेज गर्मी, खेतों में उपयोग होने वाले जहरीले रसायन या पर्यावरणीय असंतुलन जैसी संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बाद इस क्षेत्र में हरियल पक्षी दिखाई दिए थे। ऐसे में अचानक उनकी मौत ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल जांच कर दोषी कारणों का पता लगाने और पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
महाराष्ट्र का राजकीय पक्षी है हरियल, पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण
हरियल, जिसे हरिल, होरील या हरा कबूतर भी कहा जाता है, अपनी खूबसूरती और विशिष्ट जीवनशैली के लिए जाना जाता है। यह महाराष्ट्र का राजकीय पक्षी भी है। हल्के हरे रंग, पीले पैरों, सुनहरी धारियों वाले पंखों और आंखों के चारों ओर गुलाबी घेरे के कारण इसकी पहचान अलग होती है। इसके कंधों पर बैंगनी-लाल रंग का धब्बा भी पाया जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार हरियल पूरी तरह वृक्षवासी पक्षी है और अपना अधिकांश जीवन पीपल, बरगद, गूलर तथा अंजीर जैसे ऊंचे पेड़ों पर बिताता है। यह फलों का सेवन कर बीजों को दूर-दूर तक फैलाता है, जिससे नए पौधों और पेड़ों के विकास में मदद मिलती है। इसी वजह से इसे जंगलों और जैव विविधता का महत्वपूर्ण संरक्षक माना जाता है।कहलगांव में हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग से मृत पक्षियों का परीक्षण कर मौत के कारणों का पता लगाने की मांग की है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र से हरियल पक्षियों की संख्या तेजी से घट सकती है, जो पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।




































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