कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम ढहने की दर्दनाक घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर 16 पहुंच गई है। हादसे के बाद से राहत एवं बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटा हुआ है। वहीं, इस दुर्घटना में घायल हुए 17 श्रमिकों का इलाज शहर के एसएसकेएम अस्पताल में जारी है।
मलबे में दबे लोगों की तलाश में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना के बाद से इलाके में व्यापक बचाव अभियान चलाया जा रहा है। भू-भेदी रडार, खोजी कुत्तों और भारी मशीनों की मदद से मलबे की परतें हटाई जा रही हैं ताकि फंसे हुए लोगों तक पहुंचा जा सके। कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन इकाई, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा, कोलकाता नगर निगम, नागरिक सुरक्षा दल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और सेना के जवान लगातार अभियान में लगे हुए हैं।
17 घायल श्रमिकों का अस्पताल में इलाज जारी
हादसे में घायल 17 श्रमिकों को तत्काल एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य स्थिर बताए जा रहे हैं।
पुलिस जांच और गिरफ्तारियां तेज
पुलिस प्रशासन ने इस मामले में जांच को तेज कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच कोलकाता पुलिस की अपराध शाखा कर रही है और पुलिस आयुक्त स्वयं पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। इस केस में अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
भ्रष्टाचार और निर्माण मंजूरी पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री स्तर पर दिए गए बयान के अनुसार, शुरुआती जांच में निर्माण मंजूरी से जुड़े पुराने निर्णयों पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि पूर्व प्रशासन के समय भ्रष्टाचार के कारण इस निर्माण को मंजूरी मिली थी। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि तत्कालीन नगर प्रशासन से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए थे।
बिना रिकॉर्ड के मजदूरों की मौजूदगी बनी चुनौती
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि निर्माण स्थल पर मौजूद श्रमिकों की सही संख्या का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसी कारण मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है।
चार दिन बाद भी जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब भी मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। लोहे की बीम और भारी संरचना के ढहने से स्थिति बेहद जटिल हो गई थी, जिसके चलते बचाव कार्य में समय लग रहा है।











