तेहरान, अंग भारत। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है, और ताजा घटनाक्रम यह है कि ईरान ने साफ कर दिया है कि वहां बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने का काम सिर्फ और सिर्फ वही करेगा। ईरान ने किसी भी विदेशी ताकत, खासकर फ्रांस की भागीदारी को सिरे से खारिज कर दिया है। यह एक ऐसा रणनीतिक क्षेत्र है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति के लिए निर्भर है, इसलिए यहां कोई भी अनबन वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है।
ईरान की दो टूक
ईरान के उप विदेशमंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोमवार को इस मसले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौतों के तहत यह जिम्मेदारी पूरी तरह ईरान की बनती है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कड़े शब्दों में संदेश दिया कि किसी भी तीसरे देश का इस समुद्री गलियारे में हस्तक्षेप न केवल अनावश्यक है, बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा भी बन सकता है। उनका मानना है कि ईरान अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और वहां की बाधाओं को दूर करने में पूरी तरह सक्षम है।
फ्रांस का दखल और विवाद
मामले ने तब तूल पकड़ा जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यह घोषणा की कि फ्रांस और ओमान अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरंगें हटाने की दिशा में काम करेंगे। मैक्रों का यह बयान ईरान को नागवार गुजरा। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ एक उकसावे के रूप में देखा है।
- मैक्रों का अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने का विचार।
- ईरान का अपनी संप्रभुता पर अडिग रहना।
- पश्चिमी देशों के साथ भरोसे का गहरा संकट।
कतर बैठक की अफवाह
मीडिया में खबरें तैर रही थीं कि कतर में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों की कोई गुप्त बैठक होने वाली है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन सभी दावों को पूरी तरह से नकार दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी प्रकार की वार्ता की कोई योजना नहीं है, जो यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरी अभी भी काफी बनी हुई है।
6 अरब डॉलर का पेंच
इस पूरे तनाव के बीच एक बड़ी आर्थिक खबर भी सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति ने पुष्टि की है कि उन्हें कतर में अटकी हुई लगभग 6 अरब डॉलर की संपत्ति वापस मिलने की उम्मीद है। यह राशि दोनों देशों के बीच हुए उस समझौता ज्ञापन का अहम हिस्सा है, जो लंबे समय से विवादों में घिरा था। वित्तीय जानकारों का मानना है कि यह धन ईरान के लिए काफी मायने रखता है, लेकिन इसके मिलने की प्रक्रिया अभी भी राजनीतिक पेचीदगियों में फंसी है।
रणनीतिक महत्व और भविष्य
कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के एरॉन डेविड मिलर जैसे विशेषज्ञों का साफ कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थितियां बहुत नाजुक हैं। यह केवल एक पानी का रास्ता नहीं है, बल्कि दुनिया की आर्थिक धमनियों में से एक है।
“होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे रास्तों पर ईरान का नियंत्रण उसे एक शक्तिशाली मोलभावकर्ता बनाता है। यहां तनाव का अर्थ है सीधे तौर पर वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल।”
इस पूरे मामले में जो सबसे बड़ा खतरा दिख रहा है, वह है ‘गलतफहमी’। अगर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तालमेल नहीं बैठा, तो मामूली सी सैन्य गतिविधि भी किसी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती है। फिलहाल, गेंद ईरान के पाले में है और दुनिया यह देख रही है कि वे बारूदी सुरंगों के इस सफाई अभियान को कैसे और कब तक पूरा करते हैं।
मुख्य बिंदु:
- सुरंग सफाई का काम ईरान अकेले करेगा।
- फ्रांस के प्रस्ताव को ईरान ने नकारा।
- अमेरिका-ईरान के बीच आधिकारिक वार्ता से इनकार।
- 6 अरब डॉलर की राशि बहाली का इंतज़ार।








