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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भरा मतदाता सूची पुनरीक्षण फॉर्म,नागरिकों से सहयोग की अपील

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण फॉर्म भरते हुए और नागरिकों से चुनाव आयोग के अभियान में सहयोग की अपील करते हुए।

नई दिल्ली, अंग भारत। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को उपराष्ट्रपति भवन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत अपना फॉर्म भरकर यह संदेश दिया कि लोकतंत्र की नींव एक सटीक मतदाता सूची ही होती है। इस प्रक्रिया को पूरा करते हुए उन्होंने न केवल अपनी नागरिक जिम्मेदारी का निर्वहन किया, बल्कि पूरे देश के युवाओं और पात्र मतदाताओं को आगे आकर लोकतंत्र को मजबूत करने का आह्वान भी किया। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की टीम की उपस्थिति में संपन्न हुई यह प्रक्रिया यह दर्शाती है कि चुनाव आयोग की मतदाता सूची शुद्धिकरण मुहिम कितनी गंभीरता से ली जा रही है।

मतदाता सूची का महत्व

लोकतंत्र में एक वोट की कीमत अनमोल होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर मतदाता सूची में त्रुटियां हों, तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगते हैं? उपराष्ट्रपति के अनुसार, मतदाता सूची सिर्फ कागजों का एक समूह नहीं है, बल्कि यह देश के हर नागरिक की पहचान का आधार है। एक त्रुटिरहित सूची यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदान से वंचित न रहे और कोई अयोग्य व्यक्ति गलत तरीके से इसका लाभ न उठा सके।

अभियान का मुख्य उद्देश्य

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया जा रहा ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ अभियान कई स्तरों पर काम कर रहा है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाना ताकि डेटा की शुद्धता बनी रहे।
  • एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों (डुप्लीकेशन) की पहचान कर उन्हें डिलीट करना।
  • 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए युवाओं का नाम सूची में जोड़ना।
  • पता या अन्य विवरण में सुधार के लिए आवेदनों का निपटारा करना।

नागरिकों की सक्रिय भूमिका

अक्सर देखा गया है कि लोग अपना नाम मतदाता सूची में चेक करने में लापरवाही बरतते हैं। उपराष्ट्रपति ने इसी को ध्यान में रखते हुए नागरिकों से अपील की है कि वे बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के साथ पूरा सहयोग करें। जब भी आपके क्षेत्र के अधिकारी घर आएं, उन्हें सही जानकारी दें। यह छोटी सी पहल चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने में बड़ा योगदान देती है।

चुनाव आयोग का प्रयास

चुनाव आयोग की ओर से राज्य स्तर पर चलाए जा रहे इस अभियान की सफलता पूरी तरह से जन-भागीदारी पर निर्भर है। दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे गलतियों की गुंजाइश न के बराबर रहे। अगर आपका नाम अभी तक सूची में नहीं है, तो आप ‘वोटर हेल्पलाइन’ ऐप या आधिकारिक चुनाव आयोग की वेबसाइट का उपयोग करके भी आवेदन कर सकते हैं।

सटीकता क्यों जरूरी

सवाल यह उठता है कि मतदाता सूची में सुधार क्यों बार-बार किया जाता है? इसका सरल सा जवाब है: विश्वसनीयता। हर साल लाखों लोग अपना स्थान बदलते हैं, कई नए मतदाता जुड़ते हैं और कई पुराने मतदाता सूची से बाहर होते हैं। यदि इस डाटा को अपडेट न किया जाए, तो फर्जी वोटिंग का खतरा बढ़ जाता है। एक पारदर्शी और विश्वसनीय मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की सबसे बड़ी गारंटी है।

आपका कर्तव्य क्या है?

सिर्फ सरकार या चुनाव आयोग पर जिम्मेदारी छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। एक सजग नागरिक के रूप में हमें ये कदम उठाने चाहिए:

  • अपना और अपने परिवार के सदस्यों का नाम मतदाता सूची में ऑनलाइन चेक करें।
  • अगर पिछले चुनाव के बाद आपने घर बदला है, तो अपना नाम नए पते पर ट्रांसफर करवाएं।
  • मृतकों के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 भरकर संबंधित अधिकारी को सूचित करें।
  • अपने आसपास के लोगों को पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित करें।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की यह पहल बताती है कि लोकतांत्रिक मूल्य तभी सुरक्षित रहते हैं जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझता है। आगामी चुनावों में मतदान करने का आपका अधिकार तभी प्रभावी होगा, जब आपका नाम सही विवरण के साथ मतदाता सूची में दर्ज होगा। आज ही समय निकालें और इस प्रक्रिया में भागीदार बनें।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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