असम,अंग भारत| असम के मोरीगांव जिले के जागीरोड इलाके में नकली सोने की नाव के नाम पर लोगों को ठगने वाले दो शातिर ठगों को स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये दोनों आरोपी कर्नाटक और महाराष्ट्र के निवासी हैं, जो लंबे समय से इस तरह के फर्जीवाड़े को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस ने इन्हें उस समय रंगे हाथों दबोचा जब वे किसी स्थानीय व्यक्ति को यह नकली ‘सोना’ असली बताकर बेचने की कोशिश कर रहे थे। इस गिरफ्तारी ने एक बड़े अंतरराज्यीय ठगी गिरोह की ओर संकेत दिए हैं, जिसकी अब गहनता से छानबीन की जा रही है।
ऑपरेशन और गिरफ्तारी की प्रक्रिया
जागीरोड पुलिस को गुप्त सूत्रों से जानकारी मिली थी कि कुछ बाहरी लोग संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। मुखबिर ने बताया कि दो व्यक्ति क्षेत्र में ‘सोने की नाव’ जैसा दिखने वाला एक धातु का टुकड़ा लेकर घूम रहे हैं और उसे कम कीमत पर सोना बताकर लोगों को झांसा दे रहे हैं।
- सूचना मिलते ही नेली पुलिस की एक टीम ने जाल बिछाया।
- संदिग्धों को संदिग्ध परिस्थितियों में धर दबोचा गया।
- तलाशी के दौरान उनके पास से नकली सोने की नाव बरामद हुई।
- पूछताछ के तुरंत बाद मामला दर्ज कर दोनों को हिरासत में ले लिया गया।
आरोपियों की पहचान
पकड़े गए दोनों ठगों की पहचान कर्नाटक के सुमित पाटिल और महाराष्ट्र के प्रवीण कुली के रूप में हुई है। ये दोनों ही अलग-अलग राज्यों से हैं, जो यह साबित करता है कि इनका नेटवर्क काफी विस्तृत है। पुलिस इन दोनों से अलग-अलग एंगल से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर वे असम के इस ग्रामीण इलाके में क्यों आए थे और उनके संपर्क में कौन-कौन से स्थानीय लोग थे।
क्यों मशहूर है यह फ्रॉड
भारत में नकली सोने की नाव या पुरानी कलाकृतियों के नाम पर ठगी करना एक पुराना तरीका है। अक्सर ग्रामीण इलाकों में लोगों को यह कहकर बरगलाया जाता है कि उन्हें खुदाई के दौरान प्राचीन सोने की नाव मिली है। ठग लोगों को यह विश्वास दिलाते हैं कि उन्हें इसकी कीमत नहीं पता और वे इसे बहुत कम दाम में बेच देंगे। भोले-भाले लोग लालच में आकर अपनी जमा-पूंजी गंवा देते हैं।
अंतरराज्यीय गिरोह का शक
पुलिस को शक है कि सुमित और प्रवीण महज छोटे मोहरे हैं। एक बड़े गिरोह के तार कर्नाटक, महाराष्ट्र और असम जैसे राज्यों तक फैले होने की आशंका है। जांच अधिकारी इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि:
| जांच का मुख्य बिंदु | उद्देश्य |
|---|---|
| वित्तीय स्रोत | यह पता लगाना कि इनके पास यात्रा और रहने का खर्च कहां से आता था। |
| पुराने शिकार | असम के अन्य जिलों में इन्होंने अब तक कितने लोगों को लूटा है। |
| मास्टरमाइंड की तलाश | गिरोह का मुख्य संचालक कौन है जो इन्हें निर्देशित करता है। |
आम लोगों को चेतावनी
इस मामले के बाद स्थानीय पुलिस ने इलाके के निवासियों को सावधान किया है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि यदि कोई भी व्यक्ति बाजार भाव से बहुत सस्ती दर पर सोना, पुरानी मुद्राएं या सोने की प्रतिमाएं बेचने का दावा करे, तो उसे तुरंत पुलिस को सूचित करें। सोना हमेशा अधिकृत ज्वैलर्स से ही खरीदना चाहिए।
फिलहाल, पुलिस की पूछताछ जारी है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस उन सभी जगहों की मैपिंग भी कर रही है जहां इन आरोपियों ने हाल के हफ्तों में अपना ठिकाना बनाया था। यह मामला इस बात का कड़ा संदेश है कि डिजिटल युग में भी पुराने ढर्रे के फ्रॉड अब भी सक्रिय हैं और इनसे बचने के लिए जागरूकता ही एकमात्र रास्ता है।







