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बिहार में बनेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सरकार ने एआई मिशन को दी मंजूरी

बिहार में सरकार द्वारा स्थापित किए जा रहे नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का डिजिटल ग्राफिक और तकनीकी विकास की झलक

पटना,अंग भारत। बिहार सरकार ने राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने और युवाओं को नए जमाने के रोजगार से जोड़ने के लिए ‘बिहार राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (AICoE) के गठन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत कैबिनेट ने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MoA) और आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन (AoA) को भी पास कर दिया है, जिससे अब राज्य में सीधे तौर पर एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित शोध, नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा और सरकारी कामकाज में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो सकेगा। इस पहल का सीधा मकसद बिहार को सिर्फ श्रमबल उपलब्ध कराने वाले राज्य की छवि से बाहर निकालकर एक बड़े तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

एआई मिशन को हरी झंडी

बिहार के सूचना प्रावैधिकी (IT) विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने घोषणा की कि इस एआई मिशन के तहत राज्य के बड़े शहरों में एडवांस रिसर्च सेंटर और कंप्यूटर लैब बनाई जाएंगी। ये केंद्र सीधे तौर पर प्राइवेट कंपनियों, कॉलेज के छात्रों और सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम करेंगे। अक्सर देखने को मिलता है कि छोटे शहरों के युवाओं में नए आइडिया तो होते हैं, लेकिन उन्हें जमीन पर उतारने के लिए जरूरी सुपरकंप्यूटर या क्लाउड सर्वर की सुविधा नहीं मिल पाती। यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इसी कमी को पूरा करने का काम करेगा।

युवाओं को क्या मिलेगा?

  • हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग: कोडिंग और भारी डेटा प्रोसेसिंग के लिए छात्रों को दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटर सिस्टम का सपोर्ट मिलेगा।
  • स्टार्टअप के लिए मदद: नए उद्यमियों को तकनीकी सलाह के साथ-साथ सरकारी ग्रांट और जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर सीधे इस सेंटर से उपलब्ध कराया जाएगा।
  • विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: देश-विदेश के तकनीकी विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों से सीधे जुड़ने और काम सीखने का मौका मिलेगा।

कैसे बदलेगा बिहार?

बिहार जैसे राज्य के लिए तकनीक का यह कदम सिर्फ कंप्यूटर चलाने या कोडिंग करने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ और सुखाड़ की समस्या का सामना करने में यह तकनीक गेमचेंजर साबित हो सकती है। एआई की मदद से मौसम और नदियों के जलस्तर का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा, जिससे जान-माल के नुकसान को काफी हद तक समय रहते रोका जा सकता है।

“बिहार में तकनीक की इस नई लहर से न केवल नई नौकरियों के दरवाजे खुलेंगे, बल्कि पारंपरिक खेती और स्वास्थ्य सेवाओं का भी पूरी तरह से कायाकल्प होगा। यह हमारे युवाओं को उनके अपने घर में ही विश्वस्तरीय अवसरों से जोड़ेगा।”

खेती और स्वास्थ्य में बदलाव

कृषि और स्वास्थ्य दो ऐसे क्षेत्र हैं जहां इस तकनीक का सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को मिलेगा। बिहार की एक बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है और गांवों में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की जरूरत है। इस मिशन के आने से इन दोनों क्षेत्रों में बड़े सुधार देखने को मिलेंगे:

क्षेत्र (Sector) पुरानी चुनौती (Old Challenge) एआई आधारित समाधान (AI Solution)
कृषि (Agriculture) फसल की बीमारी और मौसम का गलत अनुमान स्मार्टफोन से फसल की फोटो खींचकर रोग की पहचान और सटीक उपाय
स्वास्थ्य (Healthcare) ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और मशीनों की कमी एआई-संचालित डायग्नोस्टिक टूल और तत्काल ऑनलाइन परामर्श
प्रशासन (Governance) फाइलों के निपटारे में देरी और कागजी काम स्वचालित डेटा प्रोसेसिंग और त्वरित शिकायत निवारण

आधुनिक तकनीकी ढांचा

इस योजना के तहत राज्य में क्लाउड प्लेटफॉर्म और डेटा प्लेटफॉर्म तैयार किए जाएंगे। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि बिहार का अपना एक मजबूत डेटा इकोसिस्टम हो। जब स्थानीय डेटा उपलब्ध होगा, तभी स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए सटीक एआई मॉडल बनाए जा सकेंगे। जैसे, मैथिली, भोजपुरी और मगही जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाले वॉयस बॉट्स (आवाज आधारित सहायक) तैयार किए जा सकते हैं।

स्थानीय भाषाओं में सेवा

बिहार की एक बड़ी आबादी आज भी इंटरनेट का इस्तेमाल करने में हिचकिचाती है क्योंकि ज्यादातर डिजिटल प्लेटफॉर्म अंग्रेजी या शुद्ध हिंदी में होते हैं। नए एआई मिशन के तहत क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल कंटेंट और वॉयस सर्च को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोग भी बिना किसी की मदद के सीधे अपने मोबाइल से बात करके सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे और फॉर्म भर सकेंगे।

रोजगार के नए अवसर

अक्सर बिहार के प्रतिभावान युवाओं को अच्छी नौकरियों की तलाश में बेंगलुरु, हैदराबाद या पुणे जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। इस पलायन को रोकने के लिए राज्य में ही एक ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जहां बड़ी आईटी कंपनियां निवेश कर सकें। जब बड़ी कंपनियों को दिखेगा कि बिहार में प्रशिक्षित युवाओं की बड़ी फौज और आधुनिक एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, तो वे राज्य में अपने ऑफिस खोलने के लिए आगे आएंगी।

ट्रेनिंग और हैकाथॉन

इस पूरे मिशन को जमीन पर उतारने के लिए केवल थ्योरी पढ़ना काफी नहीं होगा। सरकार इसके लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही है:

  • राज्य के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में एआई के विशेष कोर्स शुरू किए जाएंगे।
  • नियमित रूप से कोडिंग प्रतियोगिताओं (हैकाथॉन) का आयोजन होगा ताकि टैलेंटेड युवाओं को सीधे कंपनियों में नौकरी मिल सके।
  • सरकारी कर्मचारियों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे फाइलों का निपटारा तेजी से कर सकें और जनता का काम न अटके।
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अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

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