गुवाहाटी, अंग भारत । असम के पांच जिलों में आई भीषण बाढ़ से वर्तमान में 1,36,203 लोग बुरी तरह प्रभावित हैं और दुखद रूप से राज्य में मरने वालों की कुल संख्या 85 तक पहुंच गई है। शिवसागर जिले में तीन और शव बरामद होने के बाद स्थिति और भी भयावह हो गई है, जबकि आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार अभी भी दो लोग लापता हैं। ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जैसे जिले सबसे अधिक तबाही झेल रहे हैं, जहां हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है और सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप पड़ा है।
गंभीर होती स्थिति
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा 2 अगस्त को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ का कहर केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं है। राज्य के 21 राजस्व मंडलों के अंतर्गत आने वाले 335 गांव अभी भी पूरी तरह जलमग्न हैं। कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, यहां की 15,422 हेक्टेयर कृषि भूमि का पानी में डूबा होना भविष्य के लिए एक बड़ा आर्थिक संकट पैदा कर रहा है। धान की फसल और अन्य मौसमी खेती पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, जिससे किसानों की कमर टूट गई है।
नदियों का रौद्र रूप
बाढ़ की भयावहता का मुख्य कारण नदियों का उफान है। विशेष रूप से धनसिरि नदी अभी भी नुमलीगढ़ इलाके में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर कम होने के बजाय स्थिर बना हुआ है, जिससे राहत कार्यों में लगातार रुकावटें आ रही हैं। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से कई गांव मुख्य मार्ग से कट गए हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक खाद्य आपूर्ति तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
सरकारी राहत अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 2 अगस्त को चार दिवसीय ऊपरी असम का दौरा शुरू किया। वे सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं और जिला प्रशासन को त्वरित राहत कार्य के निर्देश दे रहे हैं। सरकार की ओर से युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि बाढ़ पीड़ितों को समय पर मदद मिल सके।
- राहत शिविर: पूरे राज्य में 39 राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है।
- आश्रित लोग: वर्तमान में 10,844 लोग इन सरकारी शिविरों में शरण लिए हुए हैं।
- वितरण केंद्र: जरूरतमंदों तक राशन और दवाएं पहुंचाने के लिए 15 राहत वितरण केंद्र बनाए गए हैं।
- मंत्रियों की निगरानी: असम सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल का नेतृत्व कर रहे हैं।
शिवसागर की त्रासदी
बाढ़ प्रभावित जिलों में शिवसागर की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। यहां के निवासियों के दिलों में आई बाढ़ की टीस अभी भी ताजा है, क्योंकि बुनियादी ढांचे का जितना नुकसान इस बार हुआ है, उसने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बचाव कार्य के दौरान जब तीन और शव बरामद हुए, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। प्रशासन ने लापता दो व्यक्तियों की तलाश के लिए एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को और अधिक सक्रिय कर दिया है।
बुनियादी ढांचे को क्षति
सड़कें और छोटे पुल बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। जब पानी का वेग अधिक होता है, तो ग्रामीण इलाकों की कच्ची और पक्की सड़कें दोनों ही कट जाती हैं। इससे प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना कठिन हो जाता है। सरकार के लिए अब प्राथमिक कार्य न केवल लोगों को खाना उपलब्ध कराना है, बल्कि उन रास्तों को फिर से जोड़ना है ताकि सामान्य आवाजाही बहाल हो सके।
| जिले का नाम | प्रभावित स्थिति |
|---|---|
| शिवसागर | सर्वाधिक प्रभावित |
| गोलाघाट | गंभीर |
| जोरहाट | गंभीर |
| चराईदेव | प्रभावित |
| धेमाजी | प्रभावित |
आने वाले दिनों में मौसम का पूर्वानुमान और नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की पैनी नजर है। राहत सामग्री की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला उपायुक्तों को अलर्ट पर रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा का दौरा इस बात का संकेत है कि सरकार इस आपदा को लेकर कितनी संजीदा है। स्थानीय लोग अब केवल पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने घरों में वापस जाकर फिर से अपनी बिखरी हुई जिंदगी को संवार सकें।







