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जम्मू-कश्मीर में आज हाई अलर्ट, अनुच्छेद 370 की बरसी पर कड़े सुरक्षा इंतजाम

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बरसी पर तैनात सुरक्षा बल और अमरनाथ यात्रा मार्ग पर कड़े सुरक्षा इंतजामों की लाइव तस्वीर।

जम्मू, अंग भारत। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने की आज सातवीं बरसी के उपलक्ष्य में पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से क्षेत्र की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति में बड़े बदलाव आए हैं, लेकिन इस तिथि के आसपास का समय हमेशा ही सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहता है। संभावित आतंकी खतरों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अमरनाथ यात्रियों की आवाजाही को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है और सार्वजनिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस संवेदनशील समय में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से हाई अलर्ट पर हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को टाला जा सके।

अमरनाथ यात्रा पर असर

अनुच्छेद 370 हटने की बरसी के मौके पर एहतियातन उठाए गए कदमों के तहत तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश के उच्च अधिकारियों ने स्थिति की समीक्षा करने के बाद यात्रा से संबंधित कई कड़े निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान सुरक्षा ऑडिट के अनुसार, तीर्थयात्रा के मार्ग पर सुरक्षा घेरा और अधिक सख्त कर दिया गया है। अधिकारियों द्वारा लिए गए प्रमुख निर्णय निम्नलिखित हैं:

  • जम्मू से बालटाल बेस कैंप की ओर जाने वाले किसी भी नए जत्थे को फिलहाल इजाजत नहीं दी गई है।
  • बालटाल से वापस जम्मू की ओर लौटने वाले यात्रियों की आवाजाही पर भी सुरक्षा के मद्देनजर अस्थायी रोक लगाई गई है।
  • जो तीर्थयात्री पहले से ही बालटाल बेस कैंप में सुरक्षित पहुंच चुके थे, उन्हें निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दर्शन करने की अनुमति दी गई है।
  • अधिकारियों का कहना है कि यात्रा को पूरी तरह से नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में जारी रखा जा रहा है।

सुरक्षा और हाई अलर्ट

खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया है कि सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी तत्व अनुच्छेद 370 की बरसी, चल रही अमरनाथ यात्रा और आगामी स्वतंत्रता दिवस के जश्न को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। जम्मू क्षेत्र के प्रमुख संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा बनाया गया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और भीड़-भाड़ वाले बाजारों को निशाना बनाने की साजिश रची जा सकती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी संभावित खतरे को विफल करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। पूरे क्षेत्र में अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई है और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है।

प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध

घाटी में शांति और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन, रैली या सार्वजनिक सभा पर पूर्ण रोक लगा दी है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रभावित क्षेत्रों की सूची काफी विस्तृत है, जिसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित जिले शामिल हैं:

  • श्रीनगर, बारामूला और कुपवाड़ा जिले।
  • बांदीपोरा, गांदरबल और बडगाम क्षेत्र।
  • पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग के संवेदनशील इलाके।

स्थानीय पुलिस की अपील

पुलवामा और शोपियां पुलिस ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए आम जनता से कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने का आग्रह किया है। अधिकारियों ने जोर दिया है कि किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही ऐसी भ्रामक जानकारी को सोशल मीडिया के माध्यम से आगे फैलाएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें। हंदवाड़ा और सोपोर पुलिस ने भी इसी तरह की घोषणा करते हुए सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक को अनिवार्य बताया है। पुलिस का कहना है कि उनकी प्राथमिकता नागरिकों की जान-माल की रक्षा करना है।

प्रशासनिक सतर्कता

बांदीपोरा पुलिस ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पूरे जिले में पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी सामान्य प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि मिली हुई पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर लिया गया है। नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए इन कदमों का मुख्य उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति को उभरने से पहले ही नियंत्रित करना है। प्रशासन ने पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे राजनीतिक दलों को भी कानून-व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने का संदेश दिया है।

“सुरक्षा कारणों से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया है। यह रोक पूरी तरह से अस्थायी है और एहतियात के तौर पर लगाई गई है ताकि सुरक्षा घेरे में कोई चूक न हो।” – एक पुलिस अधिकारी।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि प्रशासन किसी भी कीमत पर घाटी की शांति भंग नहीं होने देना चाहता। सभी संबंधित थानों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार में सख्त निगरानी रखें और किसी भी प्रकार की भड़काऊ गतिविधि को रोकने के लिए सक्रिय रहें। नागरिक सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से की गई यह तैयारी दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले को लेकर कितनी गंभीर हैं।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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