बांका,अंग भारत। स्थानीय पीबीएस कॉलेज में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कॉलेज भवन की छत पर चल रहे मरम्मत कार्य के दौरान अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि छत पर रखे पुराने फर्नीचर ने तुरंत आग पकड़ ली और देखते ही देखते स्थिति गंभीर हो गई। मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और पूरे परिसर में हड़कंप का माहौल बन गया।
मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा में चूक बनी बड़ी वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। छत पर ज्वलनशील सामग्री खुले में रखी हुई थी, जिससे आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया। हालांकि, समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे किसी बड़े हादसे से बचाव हो सका। फिर भी इस घटना ने कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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एबीवीपी ने खोला मोर्चा, जांच की उठाई मांग
इस घटना के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कॉलेज इकाई के अध्यक्ष वंश मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्राचार्य से तत्काल जांच की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही का परिणाम है। मिश्रा ने सवाल उठाया कि जब मरम्मत कार्य चल रहा था, तब सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए।उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज की संपत्ति और छात्रों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पूरे मामले की गहराई से जांच जरूरी है। एबीवीपी ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
छात्र नेताओं ने दी चेतावनी, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन
वहीं, नगर मंत्री राजन सिंह और छात्र नेता मिथुन कुमार ने भी घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती थी। उनका मानना है कि यदि आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता, तो स्थिति और भयावह हो सकती थी।छात्र नेताओं ने मांग की है कि कॉलेज प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। साथ ही भविष्य में किसी भी प्रकार के निर्माण या मरम्मत कार्य से पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि छात्रों और संस्थान की सुरक्षा बनी रहे।यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों को लेकर और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।










