अंग भारत, भागलपुर। भागलपुर के सबौर प्रखंड में इन दिनों गंगा का पानी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। एक तरफ फरका पंचायत के इंग्लिश गांव में नदी के तेज कटाव से घर गंगा में समा रहे हैं, तो दूसरी तरफ रजंदीपुर पंचायत के संतनगर बगदेर में पिछले करीब एक महीने से बाढ़ का पानी जमा है। दोनों जगहों पर ग्रामीण मुश्किल हालात में रहने को मजबूर हैं।
देखते ही देखते गंगा में समा गया मकान
फरका पंचायत के इंग्लिश गांव में गंगा का कटाव लगातार बढ़ रहा है। सोमवार सुबह ग्रामीण इतवारी साह का दो मंजिला पक्का मकान देखते ही देखते नदी में समा गया। मकान के गंगा में जाने के बाद परिवार के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।गांव में रंजीत तांती, छट्टू तांती, दीपक तांती और धनेश्वर तांती समेत कई लोगों के घर भी कटाव के बिल्कुल करीब पहुंच गए हैं। हालात को देखते हुए ग्रामीण अपने घर खाली कर सामान सुरक्षित जगह पर ले जाने में जुटे हैं।
पूरे गांव में डर का माहौल
कटाव बढ़ने से ग्रामीणों के बीच डर बना हुआ है। लोगों को आशंका है कि अगर नदी का कटाव इसी तरह चलता रहा तो गांव के कई और घर इसकी चपेट में आ सकते हैं।एक पीड़ित महिला ने बताया कि घर और सामान बचाने का समय भी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कटाव रोकने के लिए कोई ठोस काम शुरू नहीं किया गया है। इससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
दूसरी पंचायत में एक महीने से पानी
सबौर की रजंदीपुर पंचायत के संतनगर बगदेर के वार्ड नंबर 7 और 8 में भी हालात खराब हैं। यहां करीब एक महीने से बाढ़ का पानी जमा है। इलाके में चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है और लोगों को कमर से ऊपर तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।रोज कमाने-खाने वाले लोगों की परेशानी सबसे ज्यादा है। ग्रामीणों ने बताया कि पुरुषों को रोज करीब 500 रुपये की मजदूरी के लिए इसी गहरे पानी को पार कर शहर जाना पड़ता है।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि घरों में छोटे बच्चे और बुजुर्ग हैं। पानी जमा रहने के कारण अब सांप और दूसरे जहरीले जीव-जंतु भी निकलने लगे हैं। इससे लोगों को हर समय किसी हादसे का डर बना रहता है।ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ के बावजूद उन्हें अब तक पॉलिथीन, राशन और नाव जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिली हैं। किसी के बीमार पड़ने पर इलाज के लिए मेडिकल टीम की सुविधा भी नहीं है।
अधिकारी आए, लेकिन मदद नहीं मिली
ग्रामीणों के मुताबिक करीब एक सप्ताह पहले सबौर की अंचलाधिकारी दिव्या कुमारी ने इलाके का दौरा किया था। लोगों का कहना है कि अधिकारी स्थिति देखकर लौट गईं, लेकिन उसके बाद कोई राहत नहीं पहुंची।पंचायत के उप मुखिया देवेंद्र कुमार ने बताया कि बाढ़ और जलजमाव की समस्या की जानकारी लिखित और मौखिक रूप से सबौर प्रखंड के अधिकारियों को दी जा चुकी है। इसके बावजूद अभी तक राहत सामग्री नहीं पहुंची है।ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ गंगा का कटाव उनके घर छीन रहा है और दूसरी तरफ बाढ़ के पानी ने रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर दी है। अब उन्हें प्रशासन से जल्द राहत मिलने का इंतजार है।







