पटना,अंग भारत। बिहार में प्रशासनिक सुस्ती और फाइलों के चक्कर काटने से परेशान आम जनता के लिए राज्य सरकार ने ‘राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ की शुरुआत की है, जिसके तहत जनता की सभी शिकायतों को अब अधिकतम 30 दिनों के भीतर निपटाना अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय में बने नए ‘आवेदन प्राप्ति केंद्र’ और वहां तक जाने वाले ‘सहयोग पथ’ के जरिए अब लोग सीधे अपनी शिकायतें सरकार के सामने रख सकेंगे। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया है कि यदि कोई मामला निचले स्तर यानी ब्लॉक (BDO) या अंचल (CO) कार्यालय में हल नहीं हो पा रहा है, तो इस मंच के जरिए सीधे वरीय अधिकारियों की निगरानी में उसका तुरंत समाधान किया जाएगा।
शिकायतों पर पहला एक्शन
इस नए अभियान के शुरू होने के पहले ही दिन मुख्यमंत्री सचिवालय में 129 आवेदन दर्ज किए गए। सबसे खास बात यह रही कि इनमें से 100 लोग खुद हाजिर होकर अपनी परेशानी बताने पहुंचे थे। जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, शेखपुरा, सीवान, अररिया, भागलपुर और पश्चिम चंपारण जैसे दूर-दराज के जिलों से आए लोगों ने भूमि विवाद, पुलिस प्रताड़ना और स्थानीय योजनाओं में धांधली की शिकायतें दर्ज कराईं। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था के जरिए अब तक लगभग 90 फीसदी पुराने मामलों को सुलझा लिया गया है।
इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से समझने के लिए नीचे दिए गए आंकड़ों पर नजर डालें:
| विशेषता | मुख्य विवरण / लक्ष्य |
|---|---|
| शिकायत निवारण अवधि | अधिकतम 30 दिन |
| पहले दिन कुल आवेदन | 129 दर्ज (100 व्यक्तिगत उपस्थिति) |
| पेंशन निपटारे की डेडलाइन | अगले महीने की 10 तारीख |
| दावा किया गया सफलता दर | अब तक लगभग 90 प्रतिशत मामलों का समाधान |
30 दिनों की समय सीमा
बिहार में अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी छोटी-मोटी समस्याओं जैसे दाखिल-खारिज, राशन कार्ड या नाली-गली के विवादों के लिए सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते हैं। इस सहयोग कार्यक्रम के तहत 30 दिन की जो मियाद तय की गई है, वह सीधे तौर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करती है। अब बीडीओ, सीओ, एसडीएम और जिलाधिकारियों को हर हफ्ते इन आवेदनों की समीक्षा करनी होगी। अगर कोई अधिकारी शिकायत को अटका कर रखता है, तो सीधे सचिवालय स्तर से उस पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
“अगर कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी शिकायत लेकर पहुंच रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि निचले स्तर पर स्थानीय अधिकारियों ने उसकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। इस ढर्रे को अब बदलना होगा।”
— सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री, बिहार
पेंशन धारकों को बड़ी राहत
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए पेंशन उनके गुजर-बसर का मुख्य साधन होती है, लेकिन कई बार मामूली कागजी कमियों के कारण इसे रोक दिया जाता है या आवेदन रद्द कर दिए जाते हैं। इस बार सरकार ने बेहद मानवीय रवैया अपनाते हुए सख्त निर्देश दिया है कि केवल कोई एक दस्तावेज न होने के आधार पर आवेदन को सीधे खारिज न किया जाए। इसके बजाय, पहले संबंधित व्यक्ति को इसकी जानकारी दी जाए और उसे अपनी कमी सुधारने का पूरा मौका मिले। साथ ही, लंबित पेंशन के मामलों को अगले महीने की 10 तारीख तक हर हाल में क्लियर करने का आदेश दिया गया है।
मुफ्त बिजली और कमाई
इस कार्यक्रम के मंच से ‘मुख्यमंत्री सोलर योजना’ को लेकर भी बड़ा ऐलान किया गया है। ग्रामीण इलाकों में इस योजना को तेजी से फैलाने पर जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत लोगों को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का प्रावधान है। यदि आपके घर की छत खाली पड़ी है तो आप वहां सोलर पैनल लगाकर न केवल बिजली का बिल शून्य कर सकते हैं, बल्कि बची हुई अतिरिक्त बिजली को सरकारी ग्रिड को बेचकर पैसे भी कमा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य बिहार के सुदूर गांवों को ‘सोलर विलेज’ के रूप में विकसित करना है ताकि ग्रिड पर लोड कम हो और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचे।
सड़कों का काम होगा तेज
मानसून बीतने के साथ ही बिहार की बदहाल सड़कों को दुरुस्त करने का काम भी युद्ध स्तर पर शुरू करने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने ग्रामीण कार्य विभाग और पथ निर्माण विभाग को साफ लहजे में कह दिया है कि गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़कों की मरम्मत तुरंत शुरू की जाए। इसके अलावा, सरकारी दफ्तरों में आने वाली आम जनता के साथ अधिकारियों के व्यवहार को संवेदनशील बनाने की चेतावनी दी गई है ताकि लोग अपनी बात बिना किसी डर के कह सकें।
योजना का जमीनी असर
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सीधे संवाद वाले कार्यक्रम जनता और सरकार के बीच की दूरी को कम करते हैं। जब सरकार के शीर्ष स्तर से सीधे फीडबैक लिया जाता है, तो निचले स्तर का तंत्र अपने आप सक्रिय हो जाता है। हालांकि, इस योजना की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या 30 दिन की इस समय सीमा का पालन हर जिले में कड़ाई से होता है या नहीं। यदि यह व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही, तो आने वाले समय में बिहार के थानों और अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार और लापरवाही पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी।








