गुवाहाटी,अंग भारत | असम विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी पूरी ताकत बराक घाटी और राज्य के अन्य हिस्सों में झोंक दी है। 4 मार्च को भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार नीतिन नवीन ने बराक घाटी पहुंचकर चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया। उनका मुख्य फोकस पथारकांदी और कछार जिले की सीटों पर रहा, जहां उन्होंने पार्टी उम्मीदवारों के लिए जनसमर्थन जुटाने का काम किया। इस चुनावी सरगर्मी के बीच, भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपने शीर्ष नेताओं को अलग-अलग इलाकों में तैनात किया है ताकि हर निर्वाचन क्षेत्र तक पार्टी का संदेश पहुंच सके।
बराक घाटी में प्रचार
नीतिन नवीन का दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बराक घाटी में भाजपा की पकड़ मजबूत करने के इरादे से उन्होंने रामकृष्ण नगर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। वहां उन्होंने पथारकांदी के उम्मीदवार कृष्णेंदु पाल के पक्ष में जोरदार अपील की। इसके तुरंत बाद, वे लखीपुर विधानसभा क्षेत्र पहुंचे, जहां कौशिक राय की जीत सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने मतदाताओं से सीधा संवाद किया। इन सभाओं का उद्देश्य न केवल पार्टी के काम को गिनाना था, बल्कि विपक्षी दलों के दावों को धरातल पर चुनौती देना भी था।
मुख्यमंत्री का तूफानी दौरा
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा इस चुनावी रण के केंद्र में हैं। उनका प्रचार करने का अंदाज काफी आक्रामक और सीधा रहता है। माहमरा, सोनारी, नाजिरा और मरियानी जैसे क्षेत्रों में उन्होंने ‘विजय संकल्प सभाएं’ कीं। इन सभाओं में उन्होंने पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों और भविष्य के विकास रोडमैप पर मुख्य रूप से चर्चा की। जोरहाट में उनका शाम का रोड शो कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया, जिससे भाजपा का कैडर काफी उत्साहित नजर आया।
स्टार प्रचारकों की फौज
भाजपा ने केवल स्थानीय नेताओं पर भरोसा नहीं किया है, बल्कि केंद्रीय स्तर के चेहरों को भी मैदान में उतारा है। चुनाव अभियान में आई तेजी के पीछे कई बड़े नाम हैं:
- तेजस्वी सूर्या: भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ग्वालपाड़ा के लखीपुर और गुवाहाटी के दिसपुर में युवाओं को संबोधित किया।
- पेमा खांडू: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने नाओबेचा और रंगानदी जैसे इलाकों में कमान संभाली है।
- सर्बानंद सोनोवाल: केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने दुलियाजान और गुवाहाटी मध्य में जनसभाएं कर पार्टी की पकड़ मजबूत की।
विपक्ष की जवाबी रणनीति
कांग्रेस भी पीछे नहीं है। असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई निचले असम में पांच अलग-अलग सभाओं के जरिए अपनी खोई जमीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस ने अपने शीर्ष नेतृत्व पर दांव लगाया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के आगामी दौरों के साथ ही मल्लिकार्जुन खड़गे की रैलियां भी तय हैं। कांग्रेस की कोशिश है कि वह भाजपा के आक्रामक प्रचार का जवाब अपनी पुरानी योजनाओं और स्थानीय मुद्दों के जरिए दे।
चुनाव की मुख्य तारीखें
असम चुनाव में अब अंतिम चरण की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। प्रचार के शोर और राजनीतिक दांव-पेंच के बीच कुछ तिथियां तय हैं जो राज्य की सरकार का भविष्य तय करेंगी:
| कार्यक्रम | तिथि |
|---|---|
| प्रचार की समाप्ति | 7 अप्रैल (शाम) |
| मतदान की तारीख | 9 अप्रैल |
| मतगणना | 4 मई |
असम का यह चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह राज्य की विकास नीति और विचारधारा के बीच का कड़ा मुकाबला है। 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तब यह साफ हो जाएगा कि जनता ने विकास के किस मॉडल पर अपनी मुहर लगाई है। तब तक, दोनों ही खेमों के लिए हर एक दिन और हर एक वोट महत्वपूर्ण है। भाजपा का संगठनात्मक ढांचा और कांग्रेस की जवाबी सक्रियता, इस चुनाव को देश के सबसे दिलचस्प चुनावी मुकाबलों में से एक बना रही है।








