पटना,अंग भारत। बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ थाना क्षेत्र में गंगा नदी में हुई नाव दुर्घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। गुरुवार की सुबह उमानाथ घाट के करीब घटी इस हृदयविदारक घटना में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4 अन्य व्यक्ति अभी भी लापता हैं। यह हादसा उस समय हुआ जब दैनिक मजदूरी कर घर लौट रहे किसान और मजदूर नदी की लहरों के बीच फंस गए। राहत बचाव दल ने तत्परता दिखाते हुए 7 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, लेकिन शेष लोगों की तलाश का काम अब भी जारी है।
हादसे का मुख्य कारण
यह दुखद घटना तब हुई जब बिंद टोली गांव के 14 लोग अपनी जीविका चलाने के लिए नाव के जरिए समस्तीपुर के सुल्तानपुर दियारा क्षेत्र में परवल की खेती और मजदूरी के लिए गए थे। दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद जब वे वापस लौट रहे थे, तभी गंगा के बीचों-बीच अचानक तेज हवाओं का सामना करना पड़ा। नाव का संतुलन बिगड़ा और देखते ही देखते वह पानी में समा गई। चश्मदीदों के अनुसार, नाव छोटी थी और उस पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे, जिसके कारण तेज हवा को झेलने में वह नाकाम रही।
बचाव अभियान की स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया और स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। फिलहाल राहत कार्य की स्थिति इस प्रकार है:
- कुल सवार: 14 लोग।
- सुरक्षित बचे: 7 लोग।
- मृतक: 3 (शवों को बरामद कर लिया गया है)।
- लापता: 4 लोग, जिनकी तलाश जारी है।
गोताखोरों की मदद से नदी की गहराई में लगातार तलाशी ली जा रही है ताकि लापता लोगों का कोई सुराग मिल सके।
प्रशासनिक और बचाव दल
खोजबीन और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की विशेष टीमों को तैनात किया गया है। पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने स्वयं घटनास्थल का दौरा किया और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लापता लोगों को खोजने के लिए किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए। बाढ़ अनुमंडल के पदाधिकारी और डीएसपी स्तर के अधिकारी घटनास्थल पर कैंप कर रहे हैं ताकि हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा सके।
सुरक्षा नियमों का अभाव
गंगा और अन्य नदियों के दियारा क्षेत्रों में इस तरह के हादसे अक्सर सुनने में आते हैं। कई बार स्थानीय लोग पुरानी या जर्जर नावों का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें लाइफ जैकेट या अन्य सुरक्षा उपकरणों का पूरी तरह अभाव होता है। उमानाथ घाट जैसे इलाकों में, जहां मजदूर वर्ग अपनी आजीविका के लिए रोज नदी पार करता है, वहां प्रशासन को नावों के परिचालन के लिए कड़े नियम लागू करने की आवश्यकता है। क्षमता से अधिक सवारी बैठाना एक बड़ा जोखिम है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित होता है।
आगे की कार्रवाई
जिला प्रशासन अब पीड़ित परिवारों को सरकारी नियमानुसार मुआवजा देने और घटना की विस्तृत जांच करने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल प्राथमिकता केवल लापता लोगों को सुरक्षित ढूंढने या उनके शवों को बरामद करने की है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि खराब मौसम या तेज हवा के दौरान नदी में उतरने से बचें। गंगा की बदलती धारा और उफान के बीच सुरक्षा के मापदंडों का पालन करना अनिवार्य होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी को रोका जा सके।
सावधानी ही जीवन है। गंगा की लहरें कब अपना रौद्र रूप दिखा दें, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। विशेषकर दियारा क्षेत्रों में आवाजाही के दौरान सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं करना चाहिए।








