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पवन खेड़ा-गौरव गोगोई पर केस दर्ज, चुनाव प्रभावित करने का आरोप

गुवाहाटी, अंग भारत। असम की राजनीति में सोमवार का दिन एक बड़े विवाद के साथ शुरू हुआ, जब मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पवन खेड़ा और गौरव गोगोई के खिलाफ चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और गंभीर साजिश रचने के आरोप में केस दर्ज करने की घोषणा की। मामला उस समय गरमाया जब कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अवैध कंपनियों से जुड़े होने का आरोप लगाया, जिसे मुख्यमंत्री ने पूरी तरह फर्जी और राष्ट्रविरोधी ताकतों के साथ मिलकर रची गई साजिश करार दिया है।

विवाद का मुख्य कारण

विवाद की जड़ पवन खेड़ा द्वारा की गई वह प्रेस कॉन्फ्रेंस है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और वे अमेरिका में हजारों करोड़ की कंपनी चला रही हैं। इन दावों के समर्थन में कुछ दस्तावेज और तस्वीरें साझा की गईं। मुख्यमंत्री सरमा ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र बताया है। उनका कहना है कि ये दस्तावेज पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं और इनका मकसद केवल चुनाव के दौरान जनता को भ्रमित करना है।

कानूनी कार्रवाई और धाराएं

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे इस पर खामोश नहीं बैठेंगे। कानूनी प्रक्रिया के तहत निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

  • रिनिकी भुइयां सरमा की ओर से औपचारिक एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
  • भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है, जो जालसाजी और धोखाधड़ी से संबंधित हैं।
  • मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास जैसी कड़ी सजा का प्रावधान है।
  • पुलिस अब इन फर्जी दस्तावेजों के स्रोत (सोर्स) की जांच कर रही है कि आखिर ये डेटा कहाँ से तैयार किए गए।

पाकिस्तान कनेक्शन का दावा

मुख्यमंत्री सरमा ने इस विवाद को केवल एक राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने गौरव गोगोई पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता की भूख में कांग्रेस नेता इतने गिर चुके हैं कि अब वे पाकिस्तान से जुड़े तत्वों का भी सहारा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, हाल ही में पाकिस्तानी मीडिया में असम के चुनावों को लेकर असामान्य चर्चाएं देखी गई हैं, जो इस बात का संकेत है कि चुनाव को बाहर से प्रभावित करने की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश रची जा रही है।

डिजिटल प्रोपेगेंडा का खतरा

इस पूरी घटना ने सोशल मीडिया और डिजिटल जानकारी की सत्यता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने एक प्रयोग का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे एक नकली डिजिटल यूनिट के जरिए यह साबित किया जा सकता है कि इंटरनेट पर फर्जी जानकारी कितनी आसानी से फैलाई जा सकती है। यह घटना दर्शाती है कि:

“आज के दौर में केवल चुनावी रैलियां ही नहीं, बल्कि डिजिटल स्तर पर फैलाया गया झूठ भी लोकतंत्र की नींव को हिला सकता है।”

जांच का भविष्य

वर्तमान में असम पुलिस इस मामले की गहन जांच में जुटी है। सवाल यह है कि क्या ये दस्तावेज वाकई में किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा थे या केवल चुनावी रणनीति का एक हिस्सा? जांच का दायरा केवल असम तक सीमित नहीं है, बल्कि उन तकनीकी और बाहरी संपर्कों को भी खंगाला जा रहा है, जिनका जिक्र मुख्यमंत्री ने किया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ी मुसीबत साबित हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस खेमा अभी भी अपनी बात पर अड़ा हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहराने के पूरे आसार हैं।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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