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पेपर लीक मामले में CBI जांच तेज, कई आरोपित रिमांड पर

नई दिल्ली,अंग भारत। नीट (NEET) पेपर लीक मामले में सीबीआई की कार्रवाई ने जोर पकड़ लिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज अजय गुप्ता ने धनंजय लोखंडे को छह दिनों की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है, जो इस जांच का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। यह मामला महज एक परीक्षा लीक का नहीं है, बल्कि देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है। जांच एजेंसियों के पास मौजूद सबूतों से पता चलता है कि यह गिरोह न केवल व्यवस्थित था, बल्कि तकनीकी रूप से भी काफी सक्रिय था। सीबीआई अब इस नेटवर्क की हर कड़ी को तोड़ने के लिए डिजिटल फुटप्रिंट्स और वित्तीय ट्रांजैक्शन की गहनता से पड़ताल कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

रिमांड और पूछताछ

धनंजय लोखंडे की गिरफ्तारी इस पूरे रैकेट की कड़ियों को आपस में जोड़ने के लिए काफी अहम मानी जा रही है। सीबीआई की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मनीषा वाघमारे ने सबसे पहले प्रश्नपत्र हासिल किया, जिसे बाद में लोखंडे और शुभम खैरवार तक पहुँचाया गया। एजेंसी इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि इस चेन में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं।

  • मनीषा वाघमारे की संदिग्ध भूमिका पर लगातार पूछताछ जारी है।
  • लोखंडे के पास से मिले डिजिटल सबूतों का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है।
  • शुभम खैरवार के साथ लोखंडे के संबंधों की गहराई से जांच की जा रही है।

पहले भी हुई गिरफ्तारियां

यह मामला कोई नया नहीं है, बल्कि सीबीआई ने इससे पहले भी कई मुख्य आरोपितों को शिकंजे में लिया है। 14 मई को कोर्ट ने नासिक से गिरफ्तार शुभम खैरनार, जयपुर के मांगीलाल, विकास और दिनेश बिवाल, तथा गुरुग्राम के यश यादव को सात दिनों की रिमांड पर भेजा था। इन गिरफ्तारियों के बाद यह साफ हो गया कि यह रैकेट देश के अलग-अलग हिस्सों तक फैला हुआ था।

आरोपित का नाम क्षेत्र
शुभम खैरनार नासिक
मांगीलाल बिवाल जयपुर
यश यादव गुरुग्राम

डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग

जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह है टेलीग्राम और व्हाट्सऐप का संगठित इस्तेमाल। सीबीआई का मानना है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र पीडीएफ फॉर्मेट में साझा कर दिए गए थे। यह तकनीकी चूक या सुरक्षा का उल्लंघन कहना गलत होगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर एक सोची-समझी साजिश की तरह संचालित हो रहा था।

शुभम खैरनार और यश यादव के बीच हुई बातचीत के दौरान 10 से 12 लाख रुपये तक के लेनदेन का दावा किया गया है। 29 अप्रैल को ही फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्नपत्रों का लीक होना यह बताता है कि परीक्षा के सिस्टम को गहराई से हैक या समझौता किया गया था। एनडीए के निदेशक वरुण भारद्वाज की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर अब इस केस का आधार बनी है।

नई परीक्षा की चुनौती

परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया था, जिसके बाद सरकार ने 21 जून को नई तारीख घोषित की। छात्रों के लिए मानसिक तनाव और तैयारी के नए दौर का यह सफर बेहद चुनौतीपूर्ण है। सरकार ने सीबीआई को पूरी छूट दी है कि वह इस संगठित रैकेट के हर एक चेहरे को बेनकाब करे।

जांच एजेंसी अब केवल गिरफ्तारियों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रही है, बल्कि वह उन तकनीकी कमियों को भी खोज रही है जिनकी वजह से पेपर लीक हुआ। डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल चैट और बैंक अकाउंट्स में हुए हेरफेर को खंगाला जा रहा है ताकि इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके। यह जांच आने वाले समय में प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की सुरक्षा नीतियों को बदलने में एक बड़ी भूमिका निभा सकती है।

सीबीआई की जांच के मुताबिक, प्रश्नपत्र लीक करने के लिए 10 से 12 लाख रुपये की डील हुई थी, जो सीधे तौर पर एक संगठित अपराध को दर्शाती है।

आने वाले कुछ दिनों में सीबीआई की पूछताछ से और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें राउज एवेन्यू कोर्ट की अगली सुनवाई और सीबीआई द्वारा पेश की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट पर टिकी हैं। छात्रों का भरोसा बहाल करना और परीक्षा की शुचिता बनाए रखना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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