पटना,अंग भारत। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बांका के पूर्व सांसद दिग्विजय सिंह की 16वीं पुण्यतिथि पर जमुई जिले के नयागांव स्थित उनके समाधि स्थल पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित बिहार सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने नागी-नकटी-कटहरा नदी तट पर बने समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। यह आयोजन न केवल उनके राजनीतिक योगदान को याद करने का दिन था, बल्कि एक ऐसे जननेता को सम्मान देने का अवसर भी था जिन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए जीवन समर्पित कर दिया था।
दिग्विजय सिंह का व्यक्तित्व
दिग्विजय सिंह सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे बिहार की राजनीति का एक ऐसा चेहरा थे जिसे हर वर्ग का सम्मान प्राप्त था। उनका व्यक्तित्व मिलनसार और सहज था, जिसके कारण वे सत्ता के गलियारों में रहने के बावजूद आम जनता के बेहद करीब रहे। उनके काम करने का तरीका कुछ अलग था; वे फाइलों से अधिक जमीन पर काम करने में विश्वास रखते थे।
- क्षेत्रीय समस्याओं को राष्ट्रीय पटल पर ले जाने की अद्भुत क्षमता।
- दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता देना।
- युवाओं और जरूरतमंदों के लिए हमेशा उपलब्ध रहने वाला व्यवहार।
विकास और जनसेवा
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि दिग्विजय सिंह का पूरा जीवन विकास को समर्पित था। उन्होंने बांका और जमुई के समग्र विकास के लिए जो खाका खींचा था, उसका असर आज भी वहां की सड़कों, स्कूलों और बुनियादी ढांचे में दिखता है। उन्होंने हमेशा सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया, जिससे वे क्षेत्र में एक ‘डेवलपमेंट मैन’ की छवि बना सके। जनता आज भी उनके द्वारा किए गए कार्यों को मिसाल के तौर पर याद करती है।
परिवार की उपस्थिति
पुण्यतिथि के इस कार्यक्रम में उनकी धर्मपत्नी और पूर्व सांसद पुतुल कुमारी तथा उनकी सुपुत्री एवं वर्तमान सरकार में उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह उपस्थित रहीं। दोनों ने भावुक क्षणों के बीच समाधि स्थल पर नमन किया। श्रेयसी सिंह ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उनके दिखाए गए सेवा के मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
प्रमुख नेताओं की उपस्थिति
इस अवसर पर बिहार की राजनीति के कई दिग्गज शामिल हुए, जो दिग्विजय सिंह के प्रति लोगों के गहरे सम्मान को दर्शाता है। प्रमुख हस्तियों में शामिल थे:
| नाम | पद |
|---|---|
| विजय कुमार चौधरी | उप मुख्यमंत्री |
| लेशी सिंह | भवन निर्माण मंत्री |
| निशांत कुमार | स्वास्थ्य मंत्री |
| दामोदर रावत | परिवहन मंत्री |
| अरुण भारती | सांसद, जमुई |
क्यों याद किए जाते हैं?
आज के दौर में जब राजनीति में वैचारिक मतभेद गहरे होते जा रहे हैं, दिग्विजय सिंह का व्यक्तित्व एक उदाहरण है। वे अपने विरोधियों का भी सम्मान करना जानते थे और यही कारण है कि उनकी 16वीं पुण्यतिथि पर अलग-अलग दलों के नेता एक मंच पर दिखाई दिए। उनका प्रभाव केवल उनके चुनाव क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने पूरे देश में एक कुशल प्रशासक की छाप छोड़ी थी।
“दिग्विजय सिंह का जाना बिहार के लिए एक बड़ी क्षति थी, लेकिन उनके द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों की गूंज आज भी बांका और जमुई की फिजाओं में सुनाई देती है।”
अंत में, वहां जुटे स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे उनके बताए गए जनसेवा के मार्ग को कभी नहीं छोड़ेंगे। समाधि स्थल पर उमड़ी भारी भीड़ यह साबित करती है कि भले ही समय के साथ नेता दूर हो जाते हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए नेक काम जनता के दिलों में हमेशा जीवित रहते हैं। यह श्रद्धांजलि सभा एक ऐसे ‘कद्दावर नेता’ को सलाम था, जिन्होंने राजनीति के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने का सपना देखा था।








