गुवाहाटी,अंग भारत। असम विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं और भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता की वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज असम के दौरे पर पहुंच रहे हैं, जो भाजपा के चुनावी अभियान को एक नई गति देने का काम करेगा। शाह की यह यात्रा मुख्य रूप से कालियाबर में होने वाली एक विशाल जनसभा पर केंद्रित है। इस रैली का उद्देश्य एनडीए प्रत्याशी केशव महंता के पक्ष में माहौल तैयार करना और भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की सक्रियता से भाजपा असम की चुनावी तस्वीर को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रही है।
कालियाबर में चुनावी शक्ति प्रदर्शन
आज दोपहर तीन बजे कालियाबर की धरती पर अमित शाह का संबोधन होने वाला है। इस क्षेत्र में एनडीए उम्मीदवार केशव महंता के लिए यह जनसभा निर्णायक साबित हो सकती है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस रैली को केवल एक आम सभा नहीं, बल्कि एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
- भारी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी का लक्ष्य।
- एनडीए गठबंधन के एकजुट होने का स्पष्ट संदेश।
- स्थानीय बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना।
- केशव महंता के विकास कार्यों का प्रचार-प्रसार।
विकास ही मुख्य मुद्दा
अमित शाह अपने भाषणों में अक्सर सरकार के ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ पर बात करते हैं। असम में भी वे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों का ब्योरा देंगे। भाजपा के लिए पिछले पांच वर्षों में किए गए निम्नलिखित कार्य चुनावी जीत का आधार हैं:
| विकास का क्षेत्र | मुख्य उपलब्धियां |
|---|---|
| बुनियादी ढांचा | सड़क संपर्क, पुलों का निर्माण और कनेक्टिविटी। |
| कानून-व्यवस्था | क्षेत्रीय शांति और अपराधों में कमी का दावा। |
| जनकल्याण | सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ आम जनता तक। |
विपक्ष पर कड़ा प्रहार
अमित शाह की चुनावी रैलियों की एक खास पहचान उनका आक्रामक अंदाज है। वे केवल अपने काम की सराहना नहीं करते, बल्कि विपक्ष की कमियों को भी जनता के सामने उजागर करते हैं। कालियाबर की इस सभा में वे विपक्षी दलों की पिछली नीतियों और मौजूदा गठबंधन की खामियों को निशाना बना सकते हैं। इससे कार्यकर्ताओं को वह ऊर्जा मिलती है जो चुनाव के अंतिम चरणों में घर-घर जाकर वोट मांगने के लिए बहुत जरूरी होती है।
रणनीतिक दौरों का महत्व
असम में चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह का लगातार दौरा करना भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी आलाकमान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि राज्य का कोई भी कोना प्रचार से अछूता न रहे। बड़े नेताओं की मौजूदगी से चुनावी चर्चाओं में बदलाव आता है और मीडिया का ध्यान भी उसी क्षेत्र की ओर खिंच जाता है। यह बार-बार के दौरे कार्यकर्ताओं में यह विश्वास जगाते हैं कि शीर्ष नेतृत्व चुनाव को लेकर बेहद गंभीर है।
क्या बदलेगा चुनावी गणित?
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, असम की राजनीति में दांव-पेंच और तेज होते जा रहे हैं। कालियाबर सीट पर होने वाला यह मुकाबला काफी रोचक होने की उम्मीद है। अमित शाह का प्रभाव क्षेत्र के मतदाताओं पर कितना असर डालता है, यह तो चुनाव परिणामों के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि इस रैली ने चुनावी तापमान को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में अन्य बड़े नेताओं के दौरों से राजनीतिक गतिविधियां और अधिक तेज होंगी।
असम चुनाव में अब केवल विकास और वादे ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे को पछाड़ने की होड़ भी साफ दिखाई दे रही है। भाजपा ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है, और दूसरी ओर विपक्षी दल भी अपनी जमीन बचाने के लिए कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जनता का मूड किस ओर झुकता है।








