भागलपुर,अंग भारत। भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल से सटे इलाकों में मंगलवार सुबह गंगा और कोसी के जलस्तर में थोड़ी कमी दर्ज की गई। पानी घटने से लोगों को हल्की राहत जरूर मिली है, लेकिन तटबंधों पर खतरा अभी टला नहीं है। कई जगह नदी का पानी तटबंध के निचले हिस्से तक पहुंचा हुआ है। तेज बहाव के कारण तटबंधों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
कई तटबंधों पर नदी का सीधा दबाव
जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस्माईलपुर-बिंदटोली, राघोपुर, मदरौनी और चोरहर तटबंध की स्थिति अभी भी चिंता वाली बनी हुई है। इन तटबंधों के निचले हिस्से यानी टो तक नदी का पानी पहुंच रहा है। पानी का दबाव कम नहीं होने के कारण विभाग के अधिकारी लगातार मौके पर नजर बनाए हुए हैं।इस्माईलपुर-बिंदटोली में गंगा का जलस्तर मंगलवार सुबह 31.95 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के लाल निशान 31.60 मीटर से करीब 35 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर में मामूली गिरावट के बावजूद नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। ऐसे में आसपास के लोगों की चिंता अभी बनी हुई है।
राघोपुर में सबसे ज्यादा चिंता
राघोपुर इलाके में हालात सबसे ज्यादा संवेदनशील बताए जा रहे हैं। मंगलवार सुबह यहां गंगा का जलस्तर 32.85 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी स्तर 32.68 मीटर से 17 सेंटीमीटर अधिक है। हालांकि पिछले 12 घंटे में पानी करीब 5 सेंटीमीटर नीचे आया है, लेकिन नदी की तेज धारा अभी भी तटबंध के निचले हिस्से से टकरा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी में थोड़ी कमी से जरूर राहत महसूस हो रही है, लेकिन नदी की धार काफी तेज है। ऐसे में तटबंध को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसे लेकर लोग लगातार चिंतित हैं। खासकर राघोपुर और आसपास के गांवों में लोगों की नजर नदी के जलस्तर और तटबंध की स्थिति पर टिकी हुई है।
तटबंध बचाने में जुटी विभाग की टीम
तटबंधों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने बचाव कार्य तेज कर दिया है। विभाग के इंजीनियर और विशेषज्ञ मौके पर रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। कमजोर जगहों पर बोल्डर और जियोबैग डालकर तटबंध को मजबूत करने का काम चल रहा है।बाढ़ से बचाव के लिए चल रहे इस काम में विभाग की टीम दिन-रात जुटी हुई है। जहां भी तटबंध कमजोर नजर आ रहा है, वहां तुरंत बचाव सामग्री पहुंचाई जा रही है। अधिकारियों का पूरा जोर इस बात पर है कि नदी की तेज धारा तटबंध को नुकसान न पहुंचा सके।
रेलवे लाइन की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती
राघोपुर क्षेत्र में तटबंध के साथ मुख्य रेलवे लाइन की सुरक्षा भी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। नदी का पानी और तेज धारा तटबंध के निचले हिस्से पर दबाव बना रही है। ऐसे में अगर तटबंध को नुकसान पहुंचता है तो इसका असर आसपास के इलाकों के साथ रेलवे लाइन पर भी पड़ सकता है।इसी वजह से इंजीनियरों की टीम लगातार मौके पर कैंप कर स्थिति पर नजर रख रही है। पानी में कमी के बावजूद फिलहाल किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।
मामूली गिरावट से राहत, लेकिन खतरा बरकरार
गंगा और कोसी के जलस्तर में मामूली गिरावट को अच्छी खबर जरूर माना जा रहा है, लेकिन अभी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। कई जगह नदी खतरे और चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही है। तटबंधों पर पानी का दबाव भी बना हुआ है।फिलहाल प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। लोगों को भी नदी और तटबंध के आसपास बेवजह जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। आने वाले घंटों में जलस्तर में और कमी आती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।








