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गयाजी में वियतनाम राष्ट्रपति का भव्य स्वागत, महाबोधि मंदिर दर्शन

गयाजी, अंग भारत। वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने मंगलवार को आध्यात्मिक नगरी गयाजी में अपनी पहली यात्रा के साथ भारत और वियतनाम के बीच के गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊर्जा दी है। बोधगया अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा पर उतरते ही उनका भव्य स्वागत किया गया, जहाँ बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रोटोकॉल के तहत पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इस गरिमामयी समारोह में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को एक विशेष राजनायिक महत्व दिया। राष्ट्रपति तो लाम को हवाईअड्डे पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद वे सीधे महाबोधि मंदिर के लिए रवाना हुए।

सुरक्षा और स्वागत की तैयारी

राष्ट्रपति के आगमन को लेकर जिला प्रशासन पिछले कई दिनों से हाई अलर्ट मोड पर था। गयाजी की सड़कों से लेकर महाबोधि मंदिर परिसर तक सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा बनाया गया था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल, मजिस्ट्रेट और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों की तैनाती की गई थी।

  • पूरे शहर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही थी।
  • महाबोधि मंदिर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सघन तलाशी ली गई।
  • एयरपोर्ट से लेकर मंदिर तक के रूट को पूरी तरह से बैरिकेड कर दिया गया था।

महाबोधि मंदिर में विशेष प्रार्थना

हवाईअड्डे से सड़क मार्ग द्वारा महाबोधि मंदिर पहुंचे राष्ट्रपति तो लाम ने भगवान बुद्ध की पवित्र धरती को नमन किया। उन्होंने वहां विधिवत पूजा-अर्चना की, जो वियतनाम और भारत के बौद्ध-संबंधों को दर्शाता है। वियतनाम में बौद्ध धर्म के अनुयायियों की एक बड़ी आबादी है, और बोधगया उनके लिए सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति ने कुछ समय मौन ध्यान में बिताया और बौद्ध परंपराओं के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की। उनके साथ वियतनाम का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था, जिसने मंदिर की वास्तुकला और शांति का अनुभव किया।

भारत-वियतनाम संबंधों की मजबूती

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि वियतनाम के राष्ट्रपति का बोधगया आगमन दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा। यह यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं है, बल्कि यह उन आध्यात्मिक कड़ियों को जोड़ने का प्रयास है जो वर्षों से भारत और वियतनाम के लोगों के दिलों में बसी हैं।

“गयाजी में राष्ट्रपति तो लाम का आगमन भारत-वियतनाम संबंधों के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह यात्रा हमारी ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और सांस्कृतिक कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।” – सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री, बिहार।

प्रशासनिक और नागरिक प्रबंधन

गया जिला प्रशासन ने शहर की साफ-सफाई और यातायात प्रबंधन के लिए भी कड़े निर्देश दिए थे। राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर शहर के प्रमुख चौराहों को सजाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति तो लाम बोधगया के अन्य प्रमुख बौद्ध स्थलों का भी दौरा करेंगे। बोधगया को पूरी दुनिया में शांति और करुणा के केंद्र के रूप में जाना जाता है, और एक राष्ट्राध्यक्ष का वहां पहुंचना इस पवित्र स्थल की वैश्विक ख्याति को फिर से रेखांकित करता है।

आगे का कार्यक्रम

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दर्शन के दौरान आम श्रद्धालुओं के लिए कुछ समय के लिए मंदिर परिसर को प्रतिबंधित किया गया था। राष्ट्रपति के दौरे के बाद अब स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग बोधगया में विदेशी पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि की उम्मीद जता रहे हैं। वियतनामी प्रतिनिधिमंडल ने भी बिहार के आतिथ्य सत्कार की सराहना की है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए दरवाजे खोलेगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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