बांका,अंग भारत| बांका जिले के अमरपुर प्रखंड अंतर्गत भदरिया गांव स्थित ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थल को लेकर एक बार फिर उम्मीदें जाग उठी हैं। करीब पांच वर्षों से ठप पड़ी इस परियोजना को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। बुधवार को जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला ने स्थल का निरीक्षण किया, जिसके बाद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों में नई उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है।
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डीएम ने लिया स्थल का जायजा
चांदन नदी के तट पर स्थित इस स्थल का निरीक्षण करते हुए जिला पदाधिकारी ने वहां मौजूद प्राचीन अवशेषों और पूर्व में हुई खुदाई से संबंधित जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय समाजसेवी लखनलाल पाठक से स्थल के इतिहास और पूर्व के घटनाक्रम के बारे में विस्तार से चर्चा की।निरीक्षण के दौरान डीएम ने कहा कि भदरिया का यह स्थल ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण प्रतीत होता है। यहां मिले अवशेष किसी प्राचीन सभ्यता के संकेत देते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस संबंध में सभी तथ्यों को एकत्र कर संबंधित विभाग को भेजा जाएगा, ताकि आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद दोबारा खुदाई कार्य शुरू कराया जा सके।
2020 में सामने आया था रहस्य
भदरिया का यह स्थल पहली बार वर्ष 2020 में उस समय चर्चा में आया था, जब छठ पर्व के दौरान घाट की सफाई करते समय ग्रामीणों को चांदन नदी के नीचे ईंटों से बनी एक दीवार दिखाई दी। इसके बाद पूरे क्षेत्र में इस खोज की चर्चा फैल गई।स्थानीय विधायक और पूर्व मंत्री जयंत राज की पहल पर इस स्थल को लेकर राज्य स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई। बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं दो बार यहां पहुंचकर अवशेषों का निरीक्षण किया था।
नदी की धारा मोड़कर किया गया संरक्षण
स्थल को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने चांदन नदी की धारा को मोड़ने का निर्णय लिया और इसके लिए करोड़ों रुपये की लागत से बांध का निर्माण कराया गया। इसका उद्देश्य संभावित ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान से बचाना था।इसके बाद उच्च तकनीकी अध्ययन के लिए आईआईटी कानपुर की टीम को बुलाया गया। टीम ने अपने सर्वे में नदी के भीतर किसी प्राचीन सभ्यता के अवशेष होने के संकेत दिए।
खुदाई में मिले थे अहम प्रमाण
आईआईटी की रिपोर्ट के आधार पर बिहार विरासत विकास समिति को खुदाई की जिम्मेदारी सौंपी गई। खुदाई के दौरान कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक संरचनाएं और वस्तुएं मिलीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह स्थल किसी विकसित प्राचीन सभ्यता का हिस्सा रहा है।इतिहासकारों के अनुसार, यह स्थल बुद्ध काल या संभवतः कुषाण काल से भी जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इस पर अंतिम निष्कर्ष के लिए और गहन अध्ययन की आवश्यकता है।
फिर से शुरू हो सकता है काम
पिछले कुछ वर्षों से यह परियोजना विभिन्न कारणों से रुकी हुई थी, जिससे स्थानीय लोगों में निराशा थी। लेकिन हाल ही में विधायक जयंत राज ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया, जिसके बाद सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस पर कार्य शुरू करने की बात कही है।डीएम के निरीक्षण के बाद अब इस प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद और बढ़ गई है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर खुदाई दोबारा शुरू होती है, तो यह स्थल न केवल इतिहास को नई दिशा देगा बल्कि पर्यटन और रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।स्थानीय लोगों का कहना है कि भदरिया का यह स्थल बिहार ही नहीं, बल्कि देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है। अब सभी की नजरें प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।










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