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भदरिया पुरातात्विक स्थल पर फिर खुदाई की उम्मीद जगी

बांका,अंग भारत| बांका जिले के अमरपुर प्रखंड के भदरिया गांव में स्थित ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल पर फिर से खुदाई की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। लगभग पांच वर्षों से ठप पड़ी इस परियोजना में नई जान फूंकने के लिए जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला ने हाल ही में स्थल का दौरा किया है। यह पहल न केवल स्थानीय निवासियों के लिए उत्साहजनक है, बल्कि बिहार के इतिहास को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। प्रशासन की इस सक्रियता से यह उम्मीद जगी है कि प्राचीन सभ्यता के दबे हुए रहस्य जल्द ही सबके सामने होंगे।

डीएम का निरीक्षण और संकेत

हाल ही में जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला ने चांदन नदी के तट का बारीकी से निरीक्षण किया। वहां मौजूद प्राचीन ईंटों की बनावट और पूर्व में मिली पुरातात्विक वस्तुओं को देखकर उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि यह स्थान ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद समृद्ध है। उन्होंने स्थानीय समाजसेवी लखनलाल पाठक से उस दौर की जानकारी ली जब पहली बार यहां काम शुरू हुआ था। जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया है कि सभी तकनीकी तथ्यों को इकट्ठा कर संबंधित विभाग को भेजा जाएगा, ताकि खुदाई की प्रक्रिया के लिए जरूरी आधिकारिक मंजूरी मिल सके।

खोज की शुरुआत कैसे हुई

भदरिया की यह कहानी 2020 में तब शुरू हुई जब छठ घाट की सफाई के दौरान ग्रामीणों की नजर नदी के नीचे दबी हुई एक विशाल प्राचीन दीवार पर पड़ी। यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। इसके बाद तत्कालीन मंत्री और स्थानीय विधायक जयंत राज के प्रयासों से इस स्थल को सरकारी पहचान मिली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी स्वयं स्थल का दौरा कर इसके संरक्षण को लेकर गहरी रुचि दिखाई थी।

संरक्षण के लिए बड़े कदम

  • चांदन नदी की धारा को सफलतापूर्वक मोड़ा गया।
  • करोड़ों रुपये की लागत से बांध का निर्माण हुआ।
  • नदी की कटाव से धरोहर को बचाने की पुख्ता व्यवस्था हुई।
  • आईआईटी कानपुर की टीम ने अत्याधुनिक उपकरणों से सर्वे किया।

प्राचीन सभ्यता का प्रमाण

आईआईटी कानपुर की टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि नदी के भीतर एक प्राचीन सभ्यता दबी हुई है। इसके बाद बिहार विरासत विकास समिति ने जब खुदाई की, तो कई ऐसे साक्ष्य मिले जिन्होंने इतिहासकारों को हैरान कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये अवशेष बुद्ध काल या उससे भी पुराने कुषाण काल से संबंधित हो सकते हैं। हालांकि, अभी भी कई परतें खुलनी बाकी हैं, जिसके लिए व्यवस्थित और व्यापक खुदाई अनिवार्य है।

भविष्य की संभावनाएं

पिछले कई वर्षों से वित्तीय और प्रशासनिक कारणों से काम रुका हुआ था, जिससे स्थानीय लोगों में मायूसी थी। लेकिन हाल ही में विधायक जयंत राज द्वारा विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद 2025-26 के वित्तीय वर्ष में काम शुरू करने की प्रबल संभावना बन गई है।

स्थानीय जनता को उम्मीद

ग्रामीणों का मानना है कि यह स्थल केवल मिट्टी का ढेर नहीं, बल्कि बांका की पहचान है। खुदाई दोबारा शुरू होने से न केवल इतिहास के पन्ने फिर से लिखे जाएंगे, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी नई राहें खुलेंगी। अगर सरकार इसे ‘पर्यटन सर्किट’ से जोड़ती है, तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अभी पूरा इलाका इस उम्मीद के साथ प्रशासन की अगली चाल का इंतजार कर रहा है कि कब फिर से फावड़े चलेंगे और इतिहास की नई कहानी बाहर आएगी।

“भदरिया की मिट्टी में दबी संस्कृति हमारे पूर्वजों का गौरव है। इसे संरक्षित करना और पूरी दुनिया के सामने लाना हम सभी की जिम्मेदारी है।” — एक स्थानीय निवासी की राय।

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अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

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