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जन सुराज का बड़ा ऐलान, जुलाई से सदस्यता अभियान

बांका,अंग भारत। प्रशांत किशोर ने बिहार में जन सुराज अभियान को लेकर बड़ा ऐलान किया है। शनिवार को बांका में आयोजित बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि जुलाई महीने से पूरे राज्य में व्यापक सदस्यता अभियान शुरू किया जाएगा। इससे पहले अप्रैल, मई और जून के दौरान संगठन को जमीनी स्तर पर पुनर्गठित किया जाएगा।

संगठन मजबूत करने पर जोर

बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत जिले के दौरे पर पहुंचे प्रशांत किशोर ने होटल मधुवन विहार में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि अब समय है कि संगठन को नई ऊर्जा के साथ खड़ा किया जाए और जन सुराज को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक पहल नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बनाने का प्रयास है। इसके लिए हर कार्यकर्ता को घर-घर जाकर लोगों से जुड़ना होगा और उन्हें अभियान के उद्देश्य के बारे में बताना होगा।

जुलाई से राज्यव्यापी सदस्यता अभियान

बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले तीन महीनों में संगठन की संरचना को मजबूत किया जाएगा। इसके बाद जुलाई से राज्यभर में बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। उनका लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाए और जन सुराज को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित किया जाए।उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह अभियान बिहार की राजनीति में नई दिशा तय करेगा, बशर्ते कार्यकर्ता पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम करें।

गांधी आश्रम में लिए गए संकल्प का जिक्र

प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में पश्चिम चंपारण स्थित गांधी भितिहरवा आश्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि चुनाव परिणाम के बाद यहां उपवास रखकर यह निर्णय लिया गया था कि राज्य की नई सरकार को अपने वादे पूरे करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि तय समय के बाद जनता के बीच जाकर सच्चाई सामने रखी जाएगी और बिहार नवनिर्माण अभियान को और तेज किया जाएगा।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

बैठक के दौरान प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धनबल का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च कर वोट खरीदे गए।उन्होंने यह भी दावा किया कि 202 विधायकों के समर्थन के बावजूद तीन महीने के भीतर मुख्यमंत्री को पद छोड़ना पड़ा, जो यह दर्शाता है कि यह जीत लोकप्रियता नहीं बल्कि व्यवस्था और पैसे के प्रभाव का परिणाम थी।

बिहार की राजनीति पर उठाए सवाल

उन्होंने आगे कहा कि बिहार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी राज्य की प्राथमिकताएं नहीं बदल रहीं। उनका आरोप था कि नीतीश कुमार के बाद जो भी नेतृत्व करेगा, उसकी चिंता बिहार से अधिक अन्य राज्यों, खासकर गुजरात, को लेकर होगी।उन्होंने कहा कि यह स्थिति राज्य के विकास के लिए चिंताजनक है और इसे बदलने के लिए जन सुराज अभियान को मजबूत करना जरूरी है।

कार्यकर्ताओं से किया आह्वान

अंत में प्रशांत किशोर ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पूरी ताकत के साथ अभियान में जुटें और लोगों तक जन सुराज के विचार पहुंचाएं। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों से बिहार में बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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