रांची, अंग भारत। झारखंड में मानसून की सक्रियता ने जोर पकड़ लिया है, जिससे राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले तीन दिनों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला रहेगा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 05 से 07 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान केवल मूसलाधार बारिश ही नहीं, बल्कि आकाशीय बिजली गिरने का भी गहरा खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने आम नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
किन जिलों में सबसे ज्यादा असर?
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बारिश का प्रभाव राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर महसूस किया जाएगा। आने वाले दिनों के लिए संभावित खतरे वाले जिलों की सूची इस प्रकार है:
- 05 जुलाई: गुमला, सिमडेगा, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम।
- 06 जुलाई: लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा और पलामू जैसे उत्तर-पश्चिमी जिले।
- 07 जुलाई: रांची समेत दक्षिण-पश्चिमी झारखंड के अधिकांश हिस्से।
इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जलभराव और निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। यात्रा करने से पहले मौसम की स्थिति को जांचना समझदारी होगी।
वज्रपात से बचने के उपाय
मानसून के इस दौर में आकाशीय बिजली (वज्रपात) सबसे बड़ा जोखिम बनकर उभरी है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में बिजली गिरने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। सुरक्षा के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है:
- खेतों में काम करने वाले किसान बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे बिल्कुल न रुकें।
- गर्जना के समय मोबाइल फोन का उपयोग करने से बचें और घर के भीतर ही रहें।
- खुले मैदानों, बिजली के खंभों और धातु की वस्तुओं से पर्याप्त दूरी बनाए रखें।
- पक्के मकानों के भीतर आश्रय लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
तापमान और बारिश के आंकड़े
बीते 24 घंटों का रिकॉर्ड बताता है कि राज्य में मानसून की वर्षा का वितरण असमान रहा है। सिमडेगा के बोलबा में सबसे अधिक 51.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो खेती के लिए सकारात्मक संकेत है। मुख्य शहरों का तापमान निम्नलिखित रहा:
| शहर | अधिकतम तापमान (°C) | न्यूनतम तापमान (°C) |
|---|---|---|
| रांची | 30.6 | 23.4 |
| जमशेदपुर | 33.2 | 27.2 |
| डाल्टनगंज | 35.0 | 26.1 |
| पाकुड़ | 35.6 | 24.5 |
किसानों के लिए सलाह
झारखंड एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां मानसून की यह बारिश खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, अत्यधिक बारिश के कारण खेतों में जलभराव न हो, इसका ध्यान रखना किसानों के लिए जरूरी है। जल निकासी की सही व्यवस्था न होने पर फसल को नुकसान पहुंच सकता है। 08 जुलाई तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खुले में कीटनाशकों का छिड़काव या उर्वरकों का प्रयोग तब तक न करें जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए।
अति आवश्यक दिशा-निर्देश
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि येलो अलर्ट का मतलब केवल बारिश नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन के प्रति तैयार रहने का संकेत भी है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। यदि आप सड़क मार्ग से यात्रा कर रहे हैं, तो धीमी गति से गाड़ी चलाएं क्योंकि सड़कों पर दृश्यता (Visibility) कम हो सकती है। किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में स्थानीय आपदा प्रबंधन केंद्र से तुरंत संपर्क करें।








