कोलकाता, अंग भारत। कोलकाता और दक्षिण बंगाल के लोग इन दिनों मानसून की एक अजीब सी स्थिति से जूझ रहे हैं। भले ही आसमान से रुक-रुककर बूंदें गिर रही हैं, लेकिन यह बारिश गर्मी से राहत देने के बजाय उमस और चिपचिपाहट को और बढ़ा रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम के मिजाज में कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला है। हवा में नमी का उच्च स्तर होने के कारण शरीर से पसीना सूख नहीं पा रहा है, जिससे सामान्य तापमान भी असहनीय महसूस हो रहा है। राहत की उम्मीद मंगलवार से है, जब बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों बढ़ने की संभावना है।
तापमान और उमस की स्थिति
रविवार की सुबह का डेटा देखें तो कोलकाता का न्यूनतम तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। यह आंकड़ा सामान्य से 1.3 डिग्री सेल्सियस अधिक है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हल्की बारिश के बाद जैसे ही धूप निकलती है, जमीन से नमी भाप बनकर ऊपर उठती है, जो वातावरण को एक ‘प्रेशर कुकर’ जैसा बना देती है।
- न्यूनतम तापमान: 28.1°C (सामान्य से 1.3°C अधिक)
- वातावरण में नमी: उच्च स्तर, जो चिपचिपाहट का मुख्य कारण है।
- अनुमान: अगले 48 घंटों तक राहत के आसार कम।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दक्षिण बंगाल में हवाओं का रुख अभी ऐसा है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आ रही है। जब तक कोई मजबूत सिस्टम नहीं बनता, तब तक तापमान में गिरावट संभव नहीं है।
मंगलवार से बदलेगा मौसम
अलीपुर मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए खास अलर्ट जारी किया है। दक्षिण बंगाल के अधिकांश जिलों में बारिश की तीव्रता में उछाल आएगा। कोलकाता समेत आसपास के इलाकों में शुक्रवार तक रुक-रुककर तेज बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
तेज हवाओं का खतरा
मंगलवार से शुरू होने वाले इस दौर में केवल बारिश ही नहीं, बल्कि तेज हवाएं भी चिंता का विषय हो सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। नदिया, मुर्शिदाबाद, पूर्व और पश्चिम बर्दवान तथा बीरभूम जैसे जिलों में आंधी के साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
उत्तर बंगाल का गंभीर हाल
दक्षिण बंगाल जहां उमस से बेहाल है, वहीं उत्तर बंगाल में मानसूनी बारिश ने विकराल रूप धारण कर लिया है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में पिछले कई हफ्तों से जो भारी बारिश हो रही है, उसने जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है।
पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच चुका है। स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य के लिए सुझाव
इस तरह के उमस भरे मौसम में सेहत को दुरुस्त रखना एक बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो ऐसे वातावरण में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का खतरा काफी बढ़ जाता है।
- पानी पर्याप्त पिएं: प्यास न लगे तो भी बीच-बीच में पानी पीते रहें।
- खान-पान: हल्का और सुपाच्य भोजन लें। बाहर का खुला खाना खाने से बचें क्योंकि नमी के कारण संक्रमण जल्दी फैलता है।
- कपड़ों का चयन: सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें ताकि पसीना आसानी से सूख सके।
- बिजली के उपकरण: गरज-चमक के दौरान बिजली के उपकरण बंद रखें और खुले स्थानों पर जाने से बचें।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में मानसून के दो अलग-अलग चेहरे देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ उत्तर बंगाल बाढ़ जैसी स्थितियों से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ दक्षिण बंगाल उमस की मार झेल रहा है। मौसम विभाग की ओर से दी गई चेतावनी को नजरअंदाज न करें, खासकर यदि आप निचले इलाकों में रह रहे हैं या बाहर यात्रा की योजना बना रहे हैं। अगले कुछ दिनों तक बाहर निकलते समय छाता और रेनकोट हमेशा साथ रखें, क्योंकि मौसम कभी भी करवट ले सकता है।







